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ईश्वर को न मानने में कौन कौन सी हानियां हैं? By वनिता कासनियां पंजाब? ईश्वरजैसे ही चोर और लुटेरे बढ़ते हैं, वैसे ही आम नागरिक सतर्क हो जाते हैं। इसी तरह, नास्तिकों के उत्पीड़न के बाद हमारे लोगों की आस्था और ईश्वर के प्रति भावनाएं भी बढ़ती हैं । 200 साल का ब्रिटिश शासन और 500 साल का मुगल साम्राज्य हमारे देश से विश्वासियों का सफाया करने में विफल रहा । मुगलों ने नालंदा पर हमला किया और नौ मिलियन पांडुलिपियों को जला दिया गया । इतिहास में ऐसे कई हमले हुए हैं, लेकिन भारतीयों का ईश्वर पर से विश्वास नहीं टूटा ।संसार के सारे प्रयास अहंकार की तृप्ति की ओर निर्देशित हैं । दुनिया में मां-बच्चे का रिश्ता निस्वार्थ होता है, लेकिन मां-बाप को भी अपने बच्चों से उम्मीदें होती हैं । हमें बताओ, भगवान में हमारी आस्था का स्वार्थ क्या है? भगवान में विश्वास न करने में क्या बुराई है?ईश्वर में विश्वास न करने का नकारात्मक पक्ष?नास्तिक हो या अज्ञेय, हर कोई बीमारी का शिकार है । अंतर यह है कि विश्वासी परहेज करने में सक्षम हैं क्योंकि उन्होंने पवित्रशास्त्र के निषेधों का पालन किया है । जब वे बीमार होते हैं, तो वे आसानी से डॉक्टर द्वारा निर्धारित आहार से संबंधित परहेज कर सकते हैं। लेकिन एक नास्तिक के लिए ऐसा करना मुश्किल है क्योंकि वह स्वतंत्र होने का आदी है ।आस्तिक और पूजा पाठ करने वाले व्यक्ति स्वाभाव से सांत होते हैं । पूजा पाठ में लगे ऐसे व्यक्तियों को गुस्सा न के बराबर ही आता है । जबकि नास्तिक व्यक्ति का मिजाज बड़ा तेज होता है । अपने इसी स्वभाव के कारण ऐसे व्यक्ति जल्द ही लड़ाई भिड़ाई की मुसीबत में पड़ जाते हैं । इनका गुस्सा जल्द ही बेकाबू हो जाता है और ये अपने से बड़ों के का अपमान करने से खुद को रोक नहीं पाते और समाज में अपना मान-सम्मान खो देते हैं ।जो लोग ईश्वर पर विश्वास करते हैं और आस्तिक होते हैं उनका स्वभाव शांत होता है । ऐसे उपासकों को विरला ही कभी क्रोध आता है । जबकि नास्तिक बहुत भावुक होते हैं । इस स्वभाव के कारण ऐसा जातक युद्ध में शीघ्र ही संकट में पड़ सकता है । उनका गुस्सा जल्द ही बेकाबू हो जाता है, और वे अपने बड़ों को ठेस पहुँचाने से पीछे नहीं हटते और समाज में अपना मान सम्मान खो देते हैं ।तीसरा नुकसान खाने-पीने का है। अधिकांश विश्वासी अपना भोजन भगवान को अर्पित करने के बाद ही खा सकते हैं। अब पिज्जा, मोमोज देवताओं को नहीं चढ़ाए जा सकते, इसलिए इस प्रकार के लोग देवताओं को चढ़ाकर केवल तवे पर पका हुआ शुद्ध भोजन ही खा सकते हैं। ऐसा भोजन करने से श्रद्धालु अनेक रोगों के शिकार से मुक्त हो जाते हैं। और नास्तिकों के पास इन हानिकारक खाद्य पदार्थों का विरोध करने का कोई कारण नहीं है इसलिए इनके बीमार होने की संभावनाएं बड़ जाती हैं ।भगवान पर अविश्वास बढ़ाता है अपराधनास्तिक नर्क और स्वर्ग में विश्वास नहीं करते। ऐसे लोग झूठ, व्यभिचार और चोरी जैसे बुरे गुणों को नहीं छोड़ते क्योंकि उन्हें नरक में जाने का डर नहीं होता है। अगर समाज में ऐसे बहुत से लोग होंगे, तो पूरा समाज अराजकता में शासन करेगा और कोई भी शांति से नहीं रहेगा। सरकार इन लोगों से बहुत नाराज़ रहती है, लेकिन उन्हें रोक नहीं सकती क्योंकि ऐसा करने वालों को जेल जाने का भी डर नहीं रहता।यदि सारे लोग ईश्वर में विश्वास नहीं करते हैं, तो समाज में भयानक बुराई होगी । कुछ पैसे के लिए लोग हत्या, चोरी और झूठ बोलना शुरू कर देंगे । यह सब आज कुछ हद तक हो रहा है, लेकिन यह इतना घातक नहीं है कि कोई घर से बाहर ही न निकल पाए । जहां तक ​​भारत की बात है तो यहाँ आस्तिकों की बड़ी संख्या के कारण चोरी, हिंसा और भ्रष्टाचार के काम ही मामले देखने को मिलते हैं । वहीं अगर हम एक ऐसे देश की बात करें जहां के लोग नास्तिक हैं तो यहां चोरी, डकैती और यहां तक ​​कि खून-खराबा तक आम बात है । ऐसे नास्तिक देश में पुलिस भी डर के साये में रहती है, आम लोगों की तो बात ही क्या।ईश्वर के होने के प्रमाणज्योतिषीय विद्वानों ने पहले बुध, बृहस्पति और शुक्र जैसे ग्रहों के लिए तिथियों के साथ पचास साल पहले ही कैलेंडर तैयार किए थे । इस प्रत्यक्ष प्रमाण से अवश्य ही कोई सर्वज्ञ जीव रहा होगा जो समय-समय पर इन ग्रहों को गतिमान करता है । अगर कोई कहता है कि प्रकृति इन ग्रहों में हेरफेर कर रही है, तो यह गलत है क्योंकि यह प्रकृति भी उन ग्रहों की तरह निष्क्रिय है । यदि कोई इसे प्राकृतिक चेतना कहता है तो अपने शब्दों में हम इसे ही सर्वशक्तिमान ईश्वर कहते हैं ।एक गाय खाती है घास, इसके नतीजतन गाय हमें दूध देती है । गाय को पालने में बहुत मेहनत लगती है, और बछड़े के जन्म के कुछ महीने बाद तक ही गाय दूध दूध दिया करती है। गाय जहां इस ईश्वरीय क्षमता से दूध बनाती है, वहीं बैल भी घास खाता है, लेकिन दूध क्यों नहीं देता? यदि आप कहते हैं कि इन सभी व्यवस्थाओं को प्राकृतिक चेतना द्वारा व्यवस्थित किया जाता है, तो हम इस चेतना को सर्वोच्च ईश्वर कहते हैं ।Vnita kasnia punjabआपको बता दें कि वैज्ञानिकों ने एक भी ऐसी मशीन नहीं बनाई है जो घास से दूध बना सके । अगर ऐसा होता, तो दूध, जो आज मिल पाना मुश्किल है, प्लास्टिक की कीमत पर सड़क पर बेचा जाता । दोस्तो आज की पोस्ट के लिए बस इतना ही । आप चाहें तो अगले लेख के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं । ग्रुप में शामिल होने के लिए यहां क्लिक करें – Join Whatsapp । दोस्तो कृपया इस लेख को किसी भी व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर जरूर करें । मित्रों, आजकल लोगों के पास न तो क्षेत्रीय ज्ञान है और न ही शास्त्रीय । क्या आप जानते हैं कि आपका यह योगदान किसी की जिंदगी भी बदल सकता है । फिर मिलेंगे एक और नयी पोस्ट के साथ जिसकी जानकारी आपको व्हाट्सप्प ग्रुप में दी जाएगी । अंत तक बने रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !



ईश्वर को न मानने में कौन कौन सी हानियां हैं?


ईश्वर

जैसे ही चोर और लुटेरे बढ़ते हैं, वैसे ही आम नागरिक सतर्क हो जाते हैं। इसी तरह, नास्तिकों के उत्पीड़न के बाद हमारे लोगों की आस्था और ईश्वर के प्रति भावनाएं भी बढ़ती हैं । 200 साल का ब्रिटिश शासन और 500 साल का मुगल साम्राज्य हमारे देश से विश्वासियों का सफाया करने में विफल रहा । मुगलों ने नालंदा पर हमला किया और नौ मिलियन पांडुलिपियों को जला दिया गया । इतिहास में ऐसे कई हमले हुए हैं, लेकिन भारतीयों का ईश्वर पर से विश्वास नहीं टूटा ।

संसार के सारे प्रयास अहंकार की तृप्ति की ओर निर्देशित हैं । दुनिया में मां-बच्चे का रिश्ता निस्वार्थ होता है, लेकिन मां-बाप को भी अपने बच्चों से उम्मीदें होती हैं । हमें बताओ, भगवान में हमारी आस्था का स्वार्थ क्या है? भगवान में विश्वास न करने में क्या बुराई है?


ईश्वर में विश्वास न करने का नकारात्मक पक्ष?

नास्तिक हो या अज्ञेय, हर कोई बीमारी का शिकार है । अंतर यह है कि विश्वासी परहेज करने में सक्षम हैं क्योंकि उन्होंने पवित्रशास्त्र के निषेधों का पालन किया है । जब वे बीमार होते हैं, तो वे आसानी से डॉक्टर द्वारा निर्धारित आहार से संबंधित परहेज कर सकते हैं। लेकिन एक नास्तिक के लिए ऐसा करना मुश्किल है क्योंकि वह स्वतंत्र होने का आदी है ।

आस्तिक और पूजा पाठ करने वाले व्यक्ति स्वाभाव से सांत होते हैं । पूजा पाठ में लगे ऐसे व्यक्तियों को गुस्सा न के बराबर ही आता है । जबकि नास्तिक व्यक्ति का मिजाज बड़ा तेज होता है । अपने इसी स्वभाव के कारण ऐसे व्यक्ति जल्द ही लड़ाई भिड़ाई की मुसीबत में पड़ जाते हैं । इनका गुस्सा जल्द ही बेकाबू हो जाता है और ये अपने से बड़ों के का अपमान करने से खुद को रोक नहीं पाते और समाज में अपना मान-सम्मान खो देते हैं ।

जो लोग ईश्वर पर विश्वास करते हैं और आस्तिक होते हैं उनका स्वभाव शांत होता है । ऐसे उपासकों को विरला ही कभी क्रोध आता है । जबकि नास्तिक बहुत भावुक होते हैं । इस स्वभाव के कारण ऐसा जातक युद्ध में शीघ्र ही संकट में पड़ सकता है । उनका गुस्सा जल्द ही बेकाबू हो जाता है, और वे अपने बड़ों को ठेस पहुँचाने से पीछे नहीं हटते और समाज में अपना मान सम्मान खो देते हैं ।

तीसरा नुकसान खाने-पीने का है। अधिकांश विश्वासी अपना भोजन भगवान को अर्पित करने के बाद ही खा सकते हैं। अब पिज्जा, मोमोज देवताओं को नहीं चढ़ाए जा सकते, इसलिए इस प्रकार के लोग देवताओं को चढ़ाकर केवल तवे पर पका हुआ शुद्ध भोजन ही खा सकते हैं। ऐसा भोजन करने से श्रद्धालु अनेक रोगों के शिकार से मुक्त हो जाते हैं। और नास्तिकों के पास इन हानिकारक खाद्य पदार्थों का विरोध करने का कोई कारण नहीं है इसलिए इनके बीमार होने की संभावनाएं बड़ जाती हैं ।

भगवान पर अविश्वास बढ़ाता है अपराध

नास्तिक नर्क और स्वर्ग में विश्वास नहीं करते। ऐसे लोग झूठ, व्यभिचार और चोरी जैसे बुरे गुणों को नहीं छोड़ते क्योंकि उन्हें नरक में जाने का डर नहीं होता है। अगर समाज में ऐसे बहुत से लोग होंगे, तो पूरा समाज अराजकता में शासन करेगा और कोई भी शांति से नहीं रहेगा। सरकार इन लोगों से बहुत नाराज़ रहती है, लेकिन उन्हें रोक नहीं सकती क्योंकि ऐसा करने वालों को जेल जाने का भी डर नहीं रहता।

यदि सारे लोग ईश्वर में विश्वास नहीं करते हैं, तो समाज में भयानक बुराई होगी । कुछ पैसे के लिए लोग हत्या, चोरी और झूठ बोलना शुरू कर देंगे । यह सब आज कुछ हद तक हो रहा है, लेकिन यह इतना घातक नहीं है कि कोई घर से बाहर ही न निकल पाए । जहां तक ​​भारत की बात है तो यहाँ आस्तिकों की बड़ी संख्या के कारण चोरी, हिंसा और भ्रष्टाचार के काम ही मामले देखने को मिलते हैं । वहीं अगर हम एक ऐसे देश की बात करें जहां के लोग नास्तिक हैं तो यहां चोरी, डकैती और यहां तक ​​कि खून-खराबा तक आम बात है । ऐसे नास्तिक देश में पुलिस भी डर के साये में रहती है, आम लोगों की तो बात ही क्या।

ईश्वर के होने के प्रमाण

ज्योतिषीय विद्वानों ने पहले बुध, बृहस्पति और शुक्र जैसे ग्रहों के लिए तिथियों के साथ पचास साल पहले ही कैलेंडर तैयार किए थे । इस प्रत्यक्ष प्रमाण से अवश्य ही कोई सर्वज्ञ जीव रहा होगा जो समय-समय पर इन ग्रहों को गतिमान करता है । अगर कोई कहता है कि प्रकृति इन ग्रहों में हेरफेर कर रही है, तो यह गलत है क्योंकि यह प्रकृति भी उन ग्रहों की तरह निष्क्रिय है । यदि कोई इसे प्राकृतिक चेतना कहता है तो अपने शब्दों में हम इसे ही सर्वशक्तिमान ईश्वर कहते हैं ।

एक गाय खाती है घास, इसके नतीजतन गाय हमें दूध देती है । गाय को पालने में बहुत मेहनत लगती है, और बछड़े के जन्म के कुछ महीने बाद तक ही गाय दूध दूध दिया करती है। गाय जहां इस ईश्वरीय क्षमता से दूध बनाती है, वहीं बैल भी घास खाता है, लेकिन दूध क्यों नहीं देता? यदि आप कहते हैं कि इन सभी व्यवस्थाओं को प्राकृतिक चेतना द्वारा व्यवस्थित किया जाता है, तो हम इस चेतना को सर्वोच्च ईश्वर कहते हैं ।

Vnita kasnia punjab

आपको बता दें कि वैज्ञानिकों ने एक भी ऐसी मशीन नहीं बनाई है जो घास से दूध बना सके । अगर ऐसा होता, तो दूध, जो आज मिल पाना मुश्किल है, प्लास्टिक की कीमत पर सड़क पर बेचा जाता । दोस्तो आज की पोस्ट के लिए बस इतना ही । आप चाहें तो अगले लेख के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं । ग्रुप में शामिल होने के लिए यहां क्लिक करें – Join Whatsapp । दोस्तो कृपया इस लेख को किसी भी व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर जरूर करें । मित्रों, आजकल लोगों के पास न तो क्षेत्रीय ज्ञान है और न ही शास्त्रीय । क्या आप जानते हैं कि आपका यह योगदान किसी की जिंदगी भी बदल सकता है । फिर मिलेंगे एक और नयी पोस्ट के साथ जिसकी जानकारी आपको व्हाट्सप्प ग्रुप में दी जाएगी । अंत तक बने रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !

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🌹🪴गीता ज्ञान🪴🌹कटप्पा – महान भक्त, जिन्होंने अपनी दोनों आँखें भेंट दे दीं By वनिता कासनियां पंजाब. कटप्पा दोस्तों आप लोगों ने बाहुबली फिल्म जरूर देखी होगी । उसमे बताया गया है कि किस तरह एक राज्य के वफादार कटप्पा ने बाहुबली के मर जाने के बाद भी शाशन का साथ निभाया । दोस्तों क्या आप जानते हैं कि आखिर यह कटप्पा नाम शास्त्रों में कहाँ से लिया गया है । चलिए आपको बताते हैं।गीता ज्ञानआज हम कटप्पा नाम के एक व्यक्ति के बारे में जानेंगे और जानेंगे कि उसने भगवान शिव को मांस का टुकड़ा और अपनी आँखें समर्पित क्यों कीं थी । कटप्पा का जन्म कालहस्ती के पास उदयपुर में एक शिकारी परिवार में हुआ था । वर्तमान के उदयपुर में जिसे उस समय उत्तर कुरु के नाम से जाना जाता था । आंध्र प्रदेश के राजमपेट में कटप्पा एक धनुर्धर एक दिन शिकार करने गया लेकिन जंगल में उन्हें एक मंदिर मिला जिसमें शिवलिंग था ।कटप्पा भगवान शिव के भक्त थे और वह भगवान शिव को कुछ देना चाहते थे परंतु वह यह नहीं समझ पा रहे थे कि शिव को भेंट कैसे और किस प्रलकार से करें । फिर उन्होंने मांस का एक टुकड़ा भेंट देने का विचार किया जो उन्हें शिकार करने से मिला था और मासूमियत से शिवलिंग पर मांस का टुकड़ा चढ़ा दिया और खुशी से यह विश्वास करते हुए चले गए कि भगवान शिव ने उनकी भेंट स्वीकार कर ली होगी ।मंदिर की देखभाल एक ब्राह्मण करता था जो मंदिर से बहुत दूर रहता था । अगले दिन जब ब्राह्मण वहाँ पहुँचा तो शिवलिंग के बगल में मांस पड़ा हुआ देखकर दंग रह गया । लेकिन फिर उन्होंने यह सोचकर अपने मन को शांत किया कि यह किसी जानवर का काम होगा और उन्होंने मंदिर की सफाई की और अपने दैनिक अनुष्ठान किए और चले गए ।कटप्पा प्रतिदिन श्रद्धा भाव से पूजा पाठ करने लगेगाँव में कटप्पा अपने तरीके से शिवलिंग की पूजा करता था । वह शिकार के बाद शिवलिंग को देखने और उससे बात करने के लिए प्रतिदिन मंदिर जाता था और अपनी श्रद्धा भावना में मांस चढ़ाता था क्योंकि उसे पता नहीं था कि भगवान की पूजा कैसे की जाती है । हर सुबह ब्राह्मण यह सोचकर शिवलिंग की सफाई करते थे कि यह किसी जानवर ने किया होगा ।एक दिन कटप्पा शिकार के बाद फिर से मंदिर गया और शिवलिंग पर कुछ धूल देखी जिसे उसने साफ करने का फैसला किया । लेकिन कटप्पा ने पाया कि उसके पास पानी लाने के लिए कोई बर्तन नहीं है । वह पास में बहती नदी के पास गया और जैसे तैसे एक बर्तन ढूढ़कर पानी भरकर लाया । फिर शिवलिंग के पास वापस चला गया और उसने सारा पानी शिवलिंग के ऊपर डाल दिया ।जब ब्राह्मण वापस मंदिर में आया तो वह शिवलिंग पर मांस और पानी देखकर घृणा से भर गया । उसे एहसास हुआ कि कोई भी जानवर ऐसा नहीं कर सकता है और केवल इंसान ही ऐसा कर सकता है । ब्राह्मण की आँखों में आंसू भर आए और उसने भगवान शिव से पूछा कि आप अपने लिए ऐसा अपमान कैसे सहन कर सकते हैं ।ईश्वर के प्रति सच्चा प्यार और भक्तिभगवान शिव ने अपने भक्त ब्राह्मण को उत्तर दिया कि जिसे तुम अपमान समझते हो, मेरे लिए दूसरे भक्त की ओर से भेंट है । मैं उनकी भक्ति से बंधा हूँ और जो कुछ भी वह प्रदान करता है उसे स्वीकार करता हूँ । भगवान शिव ने ब्राह्मण से कहा कि यदि आप उनकी भक्ति को देखना चाहते हैं तो पास में ही कहीं छिप जाएँ क्योंकि वे आने वाले हैं । ब्राह्मण झाड़ी के पास छिप गए ।कटप्पा हमेशा की तरह मांस लेकर पहुँचा तो यह देखकर हैरान रह गया कि शिव हमेशा की तरह उसकी भेंट स्वीकार नहीं कर रहे थे । कटप्पा ने सोचा कि उसने ऐसा क्या किया है कि शिव उसकी भेंट स्वीकार नहीं कर रहे हैं । उसने शिवलिंग को करीब से देखा और पाया कि शिवलिंग की दाहिनी आँख से कुछ रिस रहा था । कटप्पा ने शिवलिंग पर कुछ जड़ी बूटियां डाल दीं ताकि वो ठीक हो सकें लेकिन कटप्पा रक्त को रोकने में असफल रहे ।अंत में कटप्पा ने अपनी आँखें देने का फैसला किया । उसने चाकू निकाल कर अपनी दाहिनी आँख को निकालकर शिवलिंग पर रख दिया । खून रुक गया और कटप्पा ने राहत की सांस ली । लेकिन तभी उसने देखा कि अब बाई आँख से खून आने लगा है । उसने तुरंत अपनी दूसरी आँख निकालने के लिए चाकू निकाला । उसे लगा कि दोनों आँखों के बिना वह नहीं देख पाएगा कि उसे आँख कहाँ रखनी है ।अपनी भक्ति भावना में उसने शिव पर पैर भी रख दियाउसने अपना एक पैर शिवलिंग की आँख पर रखा और अपनी दूसरी आँख भी निकाल कर भगवान शिव को अर्पित कर दी । भगवान शिव के प्रति कटप्पा की अपार भक्ति देखकर ब्राह्मण हैरान रह गए थे । कटप्पा की भक्ति देखकर भगवान शिव प्रकट हुए और उसकी दृष्टि लौटा दी । कटप्पा ने भगवान शिव को प्रणाम किया और भगवान शिव को देख कर उनकी आँखों में खुशी के आंसू आ गए ।एक आदिवासी को संत की उपाधि प्रदान करते हुए भगवान ने दोहराया कि यह प्रभु के लिए सच्चा प्यार और भक्ति है ना कि हमारे द्वारा की जाने वाली प्रार्थना और अनुष्ठान, जो प्रभु को अपने पूरे हृदय से प्रेम करते हैं वही उसे प्राप्त करने की आशा कर सकते हैं ।तो दोस्तो आपको यह कहानी कैसी लगी आप कमेंट करके हमें अवश्य बताएं । दोस्तों क्या आप जानते हैं कि भारत देश में न जाने कितने लोग इस तरह के सच्चे श्रद्धालुओं का मजाक उड़ाते हैं । हमाराआपसे अनुरोध है इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें । दोस्तों हमें श्रद्धालुओं की भावनाओं को समझना चाहिए न कि उनका मजाक उड़ाना चाहिए । हम इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि इस दुनिया में अश्रद्धालुओं को भी सम्मान मिलना चाहिए लेकिन कुछ थोड़े बहुत श्रद्धालुओं को उनका अधिकार मिलना चाहिए ।इसी तरह की धार्मिक और मजेदार पोस्ट को पड़ते रहने के लिए हमारा व्हाट्सप्प ग्रुप ज्वाइन अवश्य करें । ग्रुप ज्वाइन कररने के लिए यहाँ क्लिक करें – Join Whatsapp । आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

  🌹🪴  गीता ज्ञान 🪴🌹 कटप्पा – महान भक्त, जिन्होंने अपनी दोनों आँखें भेंट दे दीं   By वनिता कासनियां पंजाब. कटप्पा दोस्तों आप लोगों ने बाहुबली फिल्म जरूर देखी होगी । उसमे बताया गया है कि किस तरह एक राज्य के वफादार कटप्पा ने बाहुबली के मर जाने के बाद भी शाशन का साथ निभाया । दोस्तों क्या आप जानते हैं कि आखिर यह कटप्पा नाम शास्त्रों में कहाँ से लिया गया है । चलिए आपको बताते हैं। गीता ज्ञान आज हम कटप्पा नाम के एक व्यक्ति के बारे में जानेंगे और जानेंगे कि उसने भगवान शिव को मांस का टुकड़ा और अपनी आँखें समर्पित क्यों कीं थी । कटप्पा का जन्म कालहस्ती के पास उदयपुर में एक शिकारी परिवार में हुआ था । वर्तमान के उदयपुर में जिसे उस समय  उत्तर कुरु  के नाम से जाना जाता था । आंध्र प्रदेश के राजमपेट में कटप्पा एक धनुर्धर एक दिन शिकार करने गया लेकिन जंगल में उन्हें एक मंदिर मिला जिसमें शिवलिंग था । कटप्पा भगवान शिव के भक्त थे और वह भगवान शिव को कुछ देना चाहते थे परंतु वह यह नहीं समझ पा रहे थे कि शिव को भेंट कैसे और किस प्रलकार से करें । फिर उन्होंने मांस का एक टुकड़ा...

भगवान राम का जन्म और अयोध्या में प्रवेश By वनिता कस्निया पंजाब भगवान राम का अवतार जीवों पर दया करने के लिए था । भगवान भारत भूमि पर 24 अवतार लेते हैं । कृष्ण भगवान का अवतार जीवों पर दया करने के लिए था । इसी तरह बाकी के अवतार भी जीवों का कल्याण करने के लिए थे । लेकिन एक दिन भगवान कल्कि आयेंगे और घोड़े पर सवार होकर सभी पापियों को मार देंगे । भगवान कल्कि गीता का ज्ञान नहीं देंगे, भगवान कल्कि अपने हाथ में तलवार लेकर सभी पापियों को मार देंगे । अब्दुल रहीम खान खाना ने जब रामचरितमानस पढ़ी तब उन्होंने कहा कि कि रामचरितमानस केवल हिंदुओं का ग्रंथ नहीं है वल्कि यह तो संपूर्ण मानव जाति का ग्रंथ है । गोस्वामी जी कहते हैं कि जो रामचरितमानस सरोवर में श्रद्धा पूर्वक स्नान करेंगे वे इस संसार रूपी सूरज की किरणों से नहीं जलेंगे । यह भी पढ़ें – माता कैकई का चरित्र वर्णाश्रम में विश्वास रखने वालों का भी रामचरितमानस से उद्धार होगा और जो विश्वास नहीं रखते हैं उनका भी उद्धार होगा । राम भगवान का जन्म जगत के मंगल के लिए ही हुआ । राम किसी सम्प्रदाय विशेस नहीं हैं । राम का एक अर्थ है जो सभी राष्ट्रों का मंगल करते हैं वे हैं राम । भगवान राम किसी एक के नहीं । कोई भी श्री राम कहेगा उसका कल्याण होगा । गोस्वामी तुलसीदास जी विनयपत्रिका में कहते हैं कि अगर जीव राम नाम नहीं जपेगा तो उसे कभी भी सुख मिलने वाला नहीं है । अब्दुल राम रहीम खान खाना ने कहा कि रामचरित मानस हिंदुओं के लिए वेद है और मुसलमानों के लिए कुरान है । भगवान राम का जन्म भगवान राम ने जन्म लेते ही सारे अनर्थ समाप्त कर दिए । भगवान राम इतना सुंदर रो रहे थे कि 702 महलों में आवाज जा रही थी । महाराज दशरथ बहुत प्रसन्न हो गए । जिनका राम सुनने से सुभ हो जाता है वो श्री राम दशरथ जी के यहां अवतरित हुए । जब दसरथ जी को पता चला तो कि प्रभु राम उनके यहां अवतरित हुए हैं तो वे सिंहासन से कूद पड़े । दशरथ जी स्वयं महर्षि वसिष्ठ जी के पास गए । जब प्रभु श्री राम को वसिष्ठ जी ने देखा तब कोशल्या जी से कहा कि बालक बहुत प्यारा है मुझे गोद में लेने का मन कर रहा है । चारों ओर बधाईयां बज रहीं हैं । जब भगवान श्री राम का जन्म हुआ तब एक दिन एक महीने का हुआ । सूर्य देव ने कहा कि वे कभी विश्राम नहीं लेते लेकिन आज उनके वंश में भगवान का जन्म हुआ है तो उन्होंने छुट्टी लेने का विचार किया और एक दिन एक महीने का हो गया । यह रहस्य किसी को पता नहीं चला । वशिष्ठ जी ने प्रभु का नामकरण किया । उन्होंने कहा कि जो सभी सुखों आश्रय हैं और सारे लोकों को विश्राम देने वाले हैं वे राम हैं । आज प्रभु अपने 6 ऐश्वर्यों को भूल गए और तब उनका प्रथम जन्मोत्सव मनाया गया । राम जी युद्ध जीतकर आए हनुमान जी ने भरत जी को बताया कि प्रभु श्री राम युद्ध में शत्रुओं को जीत कर आ रहे हैं । प्रभु श्री राम 14 वर्ष पहले चले गए थे अब वे युद्ध में सभी शत्रुओं को जीत कर आ रहे हैं । देवता गण उनका सुंदर यश गा रहे हैं और प्रभु श्री राम लक्ष्मण जी, माता सीता और हितकर मित्रों के साथ आ रहे हैं । प्रभु श्री राम इतने कुशल हैं कि शत्रु भी उनका यश गान किया करते हैं । दशरथ जी तपस्या करते हैं कि राम जी ही उनके बेटे बने और रावण भी तपस्या करता है कि राम जी ही उनके शत्रु बनें । श्री राम कभी हारते नहीं इसके पीछे क्या कारण है? क्या प्रभु की ईश्वरता इसका कारण है? नहीं । श्री राम का संकेत है कि अगर मेरे जैसा आचरण करोगे तो तुमको भी वही सफलता मिलेगी जो मुझे मनुष्य के रूप में मिली । राम जी के जैसा ही व्यवहार करना चाहिए । राम जी कभी पराजित नहीं होते हैं क्योंकि वे धर्म पर हैं । धर्म का अर्थ है अपने कर्तव्य का निष्ठा पूर्वक पालन करना । जब राम रावण संग्राम हो रहा था और बाल्मिकी जी कहते हैं कि रावण युद्ध में मरने का निश्चय करके आया था । जो व्यक्ति युद्ध में मरने का निश्चय करके आया है वह कितना भयंकर लड़ेगा । वाल्मिकी जी कहते हैं कि जिस तरह आकाश के समान केवल अकास ही है, समुद्र के समान समुद्र ही है उसी तरह राम जी के समान राम जी ही हैं, रावण के समान रावण ही है और राम रावण युद्ध के समान राम रावण युद्ध ही है और कोई युद्ध ऐसा नहीं हुआ । रावण रथ पर मौजूद था और प्रभु श्री राम जमीन पर थे । रावण के पास अनेक हथियार थे तब विभीषण को भगवान की सफलता पर संदेह हो गया । विभीषण भगवान के प्रेम के कारण उनका ऐश्वर्य भूल गए और प्रभु श्री राम से कहा कि हे राघव आपके पास रथ नहीं है, कवच नहीं है, चरणों में जूते नहीं हैं आप इस बलवान शत्रु को किस तरह जीत सकेंगे । रावण आपके विपक्ष ने है जिसने देवताओं को जीता है । आप किस तरह इस बलवान शत्रु को किस विधि से जीतेंगे । कौन सा रथ होगा, कवच कौनसा, ढाल तलवार बाण इत्यादि क्या होंगे । प्रभु श्री राम ने कहा कि हे मित्र बिना रथ के कोई भी रथी युद्ध जीत नहीं सकता । रावण का रथ टूट जायेगा और उसके सारथी मार जायेंगे लेकिन मेरा रथ ऐसा है जो कभी नहीं टूटेगा । भगवान राम ने कहा कि ही मित्र जिसका धर्म रूप रथ जिसके पास होता है उसे कहीं भी पराजय नहीं मिलती और वो रथ में ले आया हूं । जब में अवतार लेकर आया तो साकेत से ही वो धर्म रूप रथ लेकर आया । रथ हमेशा दिन में ही चला करता है । भगवान राम का जन्म और अयोध्या में प्रवेश जब रघुकुल के महाराज रघु ने कुबेर पर आक्रमण करने का निश्चय किया तो वे शाम के समय रथ में नहीं गए । इसी तरह जिस दिन से भगवान श्री राम कोशल्या जी के गर्भ में आए तभी से संसार में खुसियां आ गईं । CategoriesRamayan TagsRamayan राजा पौंड्रक का क्या हुआ जो अपने आप को भगवान कहता था । बागेश्वर धाम वाले महाराज जी जिनका चर्चा पूरे विश्व में है Leave a Comment Comment Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. बागेश्वर धाम लंका को असल में हनुमान जी ने नहीं जलाया था मोक्ष पाना मुश्किल है या आसान बागेश्वर बाबा से न्यूज़ चैनलों के सीधे सवाल बगेश्वर धाम दिव्य दरबार में पत्रकार लेने आए परीक्षा बागेश्वर धाम वाले महाराज जी जिनका चर्चा पूरे विश्व में है लोकप्रिय लालच से बचने का उपाय श्रृंगी ऋषि कौन थे, श्रृंगी ऋषि एक हिरण से पैदा कैसे हुए? 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भगवान राम का जन्म और अयोध्या में प्रवेश By वनिता कस्निया पंजाब  भगवान राम का अवतार जीवों पर दया करने के लिए था । भगवान भारत भूमि पर 24 अवतार लेते हैं । कृष्ण भगवान का अवतार जीवों पर दया करने के लिए था । इसी तरह बाकी के अवतार भी जीवों का कल्याण करने के लिए थे । लेकिन एक दिन भगवान कल्कि आयेंगे और घोड़े पर सवार होकर सभी पापियों को मार देंगे । भगवान कल्कि गीता का ज्ञान नहीं देंगे, भगवान कल्कि अपने हाथ में तलवार लेकर सभी पापियों को मार देंगे । अब्दुल रहीम खान खाना ने जब रामचरितमानस पढ़ी तब उन्होंने कहा कि कि रामचरितमानस केवल हिंदुओं का ग्रंथ नहीं है वल्कि यह तो संपूर्ण मानव जाति का ग्रंथ है । गोस्वामी जी कहते हैं कि जो रामचरितमानस सरोवर में श्रद्धा पूर्वक स्नान करेंगे वे इस संसार रूपी सूरज की किरणों से नहीं जलेंगे । यह भी पढ़ें – माता कैकई का चरित्र वर्णाश्रम में विश्वास रखने वालों का भी रामचरितमानस से उद्धार होगा और जो विश्वास नहीं रखते हैं उनका भी उद्धार होगा । राम भगवान का जन्म जगत के मंगल के लिए ही हुआ । राम किसी सम्प्रदाय विशेस नहीं हैं । राम का एक अर्थ है जो सभी राष्ट्रों का मंगल ...