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भगवान राम का जन्म और अयोध्या में प्रवेश By वनिता कस्निया पंजाब भगवान राम का अवतार जीवों पर दया करने के लिए था । भगवान भारत भूमि पर 24 अवतार लेते हैं । कृष्ण भगवान का अवतार जीवों पर दया करने के लिए था । इसी तरह बाकी के अवतार भी जीवों का कल्याण करने के लिए थे । लेकिन एक दिन भगवान कल्कि आयेंगे और घोड़े पर सवार होकर सभी पापियों को मार देंगे । भगवान कल्कि गीता का ज्ञान नहीं देंगे, भगवान कल्कि अपने हाथ में तलवार लेकर सभी पापियों को मार देंगे । अब्दुल रहीम खान खाना ने जब रामचरितमानस पढ़ी तब उन्होंने कहा कि कि रामचरितमानस केवल हिंदुओं का ग्रंथ नहीं है वल्कि यह तो संपूर्ण मानव जाति का ग्रंथ है । गोस्वामी जी कहते हैं कि जो रामचरितमानस सरोवर में श्रद्धा पूर्वक स्नान करेंगे वे इस संसार रूपी सूरज की किरणों से नहीं जलेंगे । यह भी पढ़ें – माता कैकई का चरित्र वर्णाश्रम में विश्वास रखने वालों का भी रामचरितमानस से उद्धार होगा और जो विश्वास नहीं रखते हैं उनका भी उद्धार होगा । राम भगवान का जन्म जगत के मंगल के लिए ही हुआ । राम किसी सम्प्रदाय विशेस नहीं हैं । राम का एक अर्थ है जो सभी राष्ट्रों का मंगल करते हैं वे हैं राम । भगवान राम किसी एक के नहीं । कोई भी श्री राम कहेगा उसका कल्याण होगा । गोस्वामी तुलसीदास जी विनयपत्रिका में कहते हैं कि अगर जीव राम नाम नहीं जपेगा तो उसे कभी भी सुख मिलने वाला नहीं है । अब्दुल राम रहीम खान खाना ने कहा कि रामचरित मानस हिंदुओं के लिए वेद है और मुसलमानों के लिए कुरान है । भगवान राम का जन्म भगवान राम ने जन्म लेते ही सारे अनर्थ समाप्त कर दिए । भगवान राम इतना सुंदर रो रहे थे कि 702 महलों में आवाज जा रही थी । महाराज दशरथ बहुत प्रसन्न हो गए । जिनका राम सुनने से सुभ हो जाता है वो श्री राम दशरथ जी के यहां अवतरित हुए । जब दसरथ जी को पता चला तो कि प्रभु राम उनके यहां अवतरित हुए हैं तो वे सिंहासन से कूद पड़े । दशरथ जी स्वयं महर्षि वसिष्ठ जी के पास गए । जब प्रभु श्री राम को वसिष्ठ जी ने देखा तब कोशल्या जी से कहा कि बालक बहुत प्यारा है मुझे गोद में लेने का मन कर रहा है । चारों ओर बधाईयां बज रहीं हैं । जब भगवान श्री राम का जन्म हुआ तब एक दिन एक महीने का हुआ । सूर्य देव ने कहा कि वे कभी विश्राम नहीं लेते लेकिन आज उनके वंश में भगवान का जन्म हुआ है तो उन्होंने छुट्टी लेने का विचार किया और एक दिन एक महीने का हो गया । यह रहस्य किसी को पता नहीं चला । वशिष्ठ जी ने प्रभु का नामकरण किया । उन्होंने कहा कि जो सभी सुखों आश्रय हैं और सारे लोकों को विश्राम देने वाले हैं वे राम हैं । आज प्रभु अपने 6 ऐश्वर्यों को भूल गए और तब उनका प्रथम जन्मोत्सव मनाया गया । राम जी युद्ध जीतकर आए हनुमान जी ने भरत जी को बताया कि प्रभु श्री राम युद्ध में शत्रुओं को जीत कर आ रहे हैं । प्रभु श्री राम 14 वर्ष पहले चले गए थे अब वे युद्ध में सभी शत्रुओं को जीत कर आ रहे हैं । देवता गण उनका सुंदर यश गा रहे हैं और प्रभु श्री राम लक्ष्मण जी, माता सीता और हितकर मित्रों के साथ आ रहे हैं । प्रभु श्री राम इतने कुशल हैं कि शत्रु भी उनका यश गान किया करते हैं । दशरथ जी तपस्या करते हैं कि राम जी ही उनके बेटे बने और रावण भी तपस्या करता है कि राम जी ही उनके शत्रु बनें । श्री राम कभी हारते नहीं इसके पीछे क्या कारण है? क्या प्रभु की ईश्वरता इसका कारण है? नहीं । श्री राम का संकेत है कि अगर मेरे जैसा आचरण करोगे तो तुमको भी वही सफलता मिलेगी जो मुझे मनुष्य के रूप में मिली । राम जी के जैसा ही व्यवहार करना चाहिए । राम जी कभी पराजित नहीं होते हैं क्योंकि वे धर्म पर हैं । धर्म का अर्थ है अपने कर्तव्य का निष्ठा पूर्वक पालन करना । जब राम रावण संग्राम हो रहा था और बाल्मिकी जी कहते हैं कि रावण युद्ध में मरने का निश्चय करके आया था । जो व्यक्ति युद्ध में मरने का निश्चय करके आया है वह कितना भयंकर लड़ेगा । वाल्मिकी जी कहते हैं कि जिस तरह आकाश के समान केवल अकास ही है, समुद्र के समान समुद्र ही है उसी तरह राम जी के समान राम जी ही हैं, रावण के समान रावण ही है और राम रावण युद्ध के समान राम रावण युद्ध ही है और कोई युद्ध ऐसा नहीं हुआ । रावण रथ पर मौजूद था और प्रभु श्री राम जमीन पर थे । रावण के पास अनेक हथियार थे तब विभीषण को भगवान की सफलता पर संदेह हो गया । विभीषण भगवान के प्रेम के कारण उनका ऐश्वर्य भूल गए और प्रभु श्री राम से कहा कि हे राघव आपके पास रथ नहीं है, कवच नहीं है, चरणों में जूते नहीं हैं आप इस बलवान शत्रु को किस तरह जीत सकेंगे । रावण आपके विपक्ष ने है जिसने देवताओं को जीता है । आप किस तरह इस बलवान शत्रु को किस विधि से जीतेंगे । कौन सा रथ होगा, कवच कौनसा, ढाल तलवार बाण इत्यादि क्या होंगे । प्रभु श्री राम ने कहा कि हे मित्र बिना रथ के कोई भी रथी युद्ध जीत नहीं सकता । रावण का रथ टूट जायेगा और उसके सारथी मार जायेंगे लेकिन मेरा रथ ऐसा है जो कभी नहीं टूटेगा । भगवान राम ने कहा कि ही मित्र जिसका धर्म रूप रथ जिसके पास होता है उसे कहीं भी पराजय नहीं मिलती और वो रथ में ले आया हूं । जब में अवतार लेकर आया तो साकेत से ही वो धर्म रूप रथ लेकर आया । रथ हमेशा दिन में ही चला करता है । भगवान राम का जन्म और अयोध्या में प्रवेश जब रघुकुल के महाराज रघु ने कुबेर पर आक्रमण करने का निश्चय किया तो वे शाम के समय रथ में नहीं गए । इसी तरह जिस दिन से भगवान श्री राम कोशल्या जी के गर्भ में आए तभी से संसार में खुसियां आ गईं । CategoriesRamayan TagsRamayan राजा पौंड्रक का क्या हुआ जो अपने आप को भगवान कहता था । बागेश्वर धाम वाले महाराज जी जिनका चर्चा पूरे विश्व में है Leave a Comment Comment Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. बागेश्वर धाम लंका को असल में हनुमान जी ने नहीं जलाया था मोक्ष पाना मुश्किल है या आसान बागेश्वर बाबा से न्यूज़ चैनलों के सीधे सवाल बगेश्वर धाम दिव्य दरबार में पत्रकार लेने आए परीक्षा बागेश्वर धाम वाले महाराज जी जिनका चर्चा पूरे विश्व में है लोकप्रिय लालच से बचने का उपाय श्रृंगी ऋषि कौन थे, श्रृंगी ऋषि एक हिरण से पैदा कैसे हुए? 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भगवान राम का जन्म और अयोध्या में प्रवेश

By वनिता कस्निया पंजाब 

भगवान राम का अवतार जीवों पर दया करने के लिए था । भगवान भारत भूमि पर 24 अवतार लेते हैं । कृष्ण भगवान का अवतार जीवों पर दया करने के लिए था । इसी तरह बाकी के अवतार भी जीवों का कल्याण करने के लिए थे ।


लेकिन एक दिन भगवान कल्कि आयेंगे और घोड़े पर सवार होकर सभी पापियों को मार देंगे । भगवान कल्कि गीता का ज्ञान नहीं देंगे, भगवान कल्कि अपने हाथ में तलवार लेकर सभी पापियों को मार देंगे ।


अब्दुल रहीम खान खाना ने जब रामचरितमानस पढ़ी तब उन्होंने कहा कि कि रामचरितमानस केवल हिंदुओं का ग्रंथ नहीं है वल्कि यह तो संपूर्ण मानव जाति का ग्रंथ है ।



गोस्वामी जी कहते हैं कि जो रामचरितमानस सरोवर में श्रद्धा पूर्वक स्नान करेंगे वे इस संसार रूपी सूरज की किरणों से नहीं जलेंगे ।


यह भी पढ़ें – माता कैकई का चरित्र


वर्णाश्रम में विश्वास रखने वालों का भी रामचरितमानस से उद्धार होगा और जो विश्वास नहीं रखते हैं उनका भी उद्धार होगा । राम भगवान का जन्म जगत के मंगल के लिए ही हुआ । राम किसी सम्प्रदाय विशेस नहीं हैं । राम का एक अर्थ है जो सभी राष्ट्रों का मंगल करते हैं वे हैं राम ।


भगवान राम किसी एक के नहीं । कोई भी श्री राम कहेगा उसका कल्याण होगा । गोस्वामी तुलसीदास जी विनयपत्रिका में कहते हैं कि अगर जीव राम नाम नहीं जपेगा तो उसे कभी भी सुख मिलने वाला नहीं है । अब्दुल राम रहीम खान खाना ने कहा कि रामचरित मानस हिंदुओं के लिए वेद है और मुसलमानों के लिए कुरान है ।


भगवान राम का जन्म

भगवान राम ने जन्म लेते ही सारे अनर्थ समाप्त कर दिए । भगवान राम इतना सुंदर रो रहे थे कि 702 महलों में आवाज जा रही थी । महाराज दशरथ बहुत प्रसन्न हो गए । जिनका राम सुनने से सुभ हो जाता है वो श्री राम दशरथ जी के यहां अवतरित हुए ।


जब दसरथ जी को पता चला तो कि प्रभु राम उनके यहां अवतरित हुए हैं तो वे सिंहासन से कूद पड़े । दशरथ जी स्वयं महर्षि वसिष्ठ जी के पास गए । जब प्रभु श्री राम को वसिष्ठ जी ने देखा तब कोशल्या जी से कहा कि बालक बहुत प्यारा है मुझे गोद में लेने का मन कर रहा है ।


चारों ओर बधाईयां बज रहीं हैं । जब भगवान श्री राम का जन्म हुआ तब एक दिन एक महीने का हुआ । सूर्य देव ने कहा कि वे कभी विश्राम नहीं लेते लेकिन आज उनके वंश में भगवान का जन्म हुआ है तो उन्होंने छुट्टी लेने का विचार किया और एक दिन एक महीने का हो गया ।


यह रहस्य किसी को पता नहीं चला । वशिष्ठ जी ने प्रभु का नामकरण किया । उन्होंने कहा कि जो सभी सुखों आश्रय हैं और सारे लोकों को विश्राम देने वाले हैं वे राम हैं । आज प्रभु अपने 6 ऐश्वर्यों को भूल गए और तब उनका प्रथम जन्मोत्सव मनाया गया ।


राम जी युद्ध जीतकर आए

हनुमान जी ने भरत जी को बताया कि प्रभु श्री राम युद्ध में शत्रुओं को जीत कर आ रहे हैं । प्रभु श्री राम 14 वर्ष पहले चले गए थे अब वे युद्ध में सभी शत्रुओं को जीत कर आ रहे हैं । देवता गण उनका सुंदर यश गा रहे हैं और प्रभु श्री राम लक्ष्मण जी, माता सीता और हितकर मित्रों के साथ आ रहे हैं ।


प्रभु श्री राम इतने कुशल हैं कि शत्रु भी उनका यश गान किया करते हैं । दशरथ जी तपस्या करते हैं कि राम जी ही उनके बेटे बने और रावण भी तपस्या करता है कि राम जी ही उनके शत्रु बनें । श्री राम कभी हारते नहीं इसके पीछे क्या कारण है? क्या प्रभु की ईश्वरता इसका कारण है? नहीं ।



श्री राम का संकेत है कि अगर मेरे जैसा आचरण करोगे तो तुमको भी वही सफलता मिलेगी जो मुझे मनुष्य के रूप में मिली । राम जी के जैसा ही व्यवहार करना चाहिए । राम जी कभी पराजित नहीं होते हैं क्योंकि वे धर्म पर हैं । धर्म का अर्थ है अपने कर्तव्य का निष्ठा पूर्वक पालन करना ।


जब राम रावण संग्राम हो रहा था और बाल्मिकी जी कहते हैं कि रावण युद्ध में मरने का निश्चय करके आया था । जो व्यक्ति युद्ध में मरने का निश्चय करके आया है वह कितना भयंकर लड़ेगा ।


वाल्मिकी जी कहते हैं कि जिस तरह आकाश के समान केवल अकास ही है, समुद्र के समान समुद्र ही है उसी तरह राम जी के समान राम जी ही हैं, रावण के समान रावण ही है और राम रावण युद्ध के समान राम रावण युद्ध ही है और कोई युद्ध ऐसा नहीं हुआ ।


रावण रथ पर मौजूद था और प्रभु श्री राम जमीन पर थे । रावण के पास अनेक हथियार थे तब विभीषण को भगवान की सफलता पर संदेह हो गया ।


विभीषण भगवान के प्रेम के कारण उनका ऐश्वर्य भूल गए और प्रभु श्री राम से कहा कि हे राघव आपके पास रथ नहीं है, कवच नहीं है, चरणों में जूते नहीं हैं आप इस बलवान शत्रु को किस तरह जीत सकेंगे ।


रावण आपके विपक्ष ने है जिसने देवताओं को जीता है । आप किस तरह इस बलवान शत्रु को किस विधि से जीतेंगे । कौन सा रथ होगा, कवच कौनसा, ढाल तलवार बाण इत्यादि क्या होंगे ।


प्रभु श्री राम ने कहा कि हे मित्र बिना रथ के कोई भी रथी युद्ध जीत नहीं सकता । रावण का रथ टूट जायेगा और उसके सारथी मार जायेंगे लेकिन मेरा रथ ऐसा है जो कभी नहीं टूटेगा ।



भगवान राम ने कहा कि ही मित्र जिसका धर्म रूप रथ जिसके पास होता है उसे कहीं भी पराजय नहीं मिलती और वो रथ में ले आया हूं । जब में अवतार लेकर आया तो साकेत से ही वो धर्म रूप रथ लेकर आया । रथ हमेशा दिन में ही चला करता है ।

भगवान राम का जन्म और अयोध्या में प्रवेश

जब रघुकुल के महाराज रघु ने कुबेर पर आक्रमण करने का निश्चय किया तो वे शाम के समय रथ में नहीं गए । इसी तरह जिस दिन से भगवान श्री राम कोशल्या जी के गर्भ में आए तभी से संसार में खुसियां आ गईं ।


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राजा पौंड्रक का क्या हुआ जो अपने आप को भगवान कहता था ।

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भाग भाग का शीर्षक

भाग-1 महाभारत की शुरुआत

भाग-2 पांडवों का जन्म

भाग-3 कौरवों का जन्म

भाग-4 द्रोणाचार्य का गुरुकुल

भाग-5 दुर्योधन और कर्ण की मित्रता

भाग-6 पांडवों को जलाने का षड्यंत्र

भाग-7 पांडव दुर्योधन से छिपकर कहां गए

भाग-8 द्रोपदी का विवाह

भाग-9 इंद्रप्रस्थ का निर्माण किसने किया

भाग-10 जरासंध को किसने मारा

भाग-11 शिशुपाल वध, भगवान ने शिशुपाल के 100 पाप क्यों क्षमा किए

भाग-12 पांडव और कौरव के बीच चौसर का खेल

भाग-13 पांडवों का वनवास

जब शकुनी ने कपटपूर्वक चौसर खेला तब भगवान कृष्ण कहां थे

भाग-14 अर्जुन और शिव जी का युद्ध, किसकी हुयी जीत

भाग-15 अर्जुन की स्वर्ग यात्रा, उर्वशी द्वारा अर्जुन को श्राप

भाग-16 राजा नल की कहानी – नल और दमयंती का विवाह कैसे हुआ

भाग-17 राजा नल की गरीबी, कलयुग ने ईर्ष्यावश सारा राज्य छीन लिया

भाग-18 राजा नल की कथा, नल ने अपना राज्य वापिस केसे जीता

भाग-19 युधिस्ठिर गए तीर्थ, नारद जी ने बताया प्रयाग तीर्थ का महत्व

भाग-20 अगस्त्य मुनि की कहानी, अगस्त्य मुनि ने समुंद्र केसे सुखाया

भाग-21 श्रृंगी ऋषि कौन थे, श्रृंगी ऋषि एक हिरण से पैदा कैसे हुए?

भाग-22 युवनाश्व राजा की कहानी जिन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया

भाग-23 पांडवों की स्वर्ग यात्रा, अर्जुन से मिलने के लिए स्वर्ग गए

भाग-24 नहुष कौन थे? नहुष इंद्र थे लेकिन एक श्राप के कारण अजगर बन गए

भाग-25 पांडवों ने दुर्योधन को गंधर्वों से क्यों बचाया

भाग-26 मुद्गल ऋषि की कहानी जो वरदान मिलने के बाद भी स्वर्ग नहीं गए

भाग-27 पांडवों ने दुर्वाशा मुनि और 1000 शिष्यों को भोजन कैसे कराया

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