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कलयुग का कड़वा सच – लड़कियों का अपने ही घर में शोषण होगा। By वनिता कासनियां पंजाब=कलयुग का कड़वा सचआपको बता दें कि इस कलियुग में लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं। कलियुग का कड़वा सच है कि लड़कियों का अपना परिवार उनके साथ व्यभिचार करेगा और इस कलयुग में तो लोगों की फसल और पानी भी चोरी हो जायेंगे । हिंदू धार्मिक ग्रंथों में दी गई जानकारी के अनुसार कलियुग के अंत में अभी काफी समय बाकी है। क्योंकि, ब्रह्मपुराण के अनुसार, कलियुग की आयु उनकी 43,200 वर्ष है और कलियुग अभी शुरू हो रहा है। , जिसका पहला चरण चल रहा है।माना जाता है कि कलियुग की शुरुआत 302 ईशा पूर्व हुई थी । इसका अर्थ यह हुआ कि कलियुग को अभी 5,120 वर्ष ही हुए हैं और कलियुग में 4,26,888 वर्ष शेष हैं, लेकिन ब्रह्मप्राण में कलियुग के अंत की व्याख्या कैसे की गई है? ब्रह्मपुराण के अनुसार, कलियुग के अंत में मानव आयु केवल 12 वर्ष की बताई गयी है । इस दौरान लोगों में नफरत और नाराजगी बढ़ जाती है ।कलियुग मे मानवता बिलुप्त हो जाएगीकलयुग का कड़वा सच है कि जैसे जैसे कलयुग की उम्र बढ़ती जाएगी वैसे वैसे नदियां सूखती जाएगी । बेइमानी और अन्याय से धन कमाने वाले लोगों में बढ़ोत्तरी होगी । धन के लोभ में मनुष्य किसी की हत्या करने में भी संकोच नहीं करेगा। मनुष्य पूजा पाठ, व्रत, उपवास और सभी धार्मिक कार्य करना बंद कर देंगे । गाय दूध देना बंद कर देगी । मानवता नष्ट हो जाएगी ।लड़कियां बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं रहेंगी। उनका अपने ही घर में शोषण होगा । कलयुग का कड़वा सच है कि अपने ही घर के लोग उनके साथ क्या व्यभिचार करेंगे । बाप बेटी का भाई बहन का कोई रिश्ता नहीं रह जाएगा । एक भाई दूसरे भाई का ही शत्रु हो जाएगा । शादी जैसा पवित्र रिश्ता अपवित्र हो जाएगा । किसी की भी शादी शुदा जिंदगी ठीक से नहीं चलेगी । पति पत्नी एक दूसरे से बेवफाई करेंगे । कलयुग में समाज हिंसक हो जाएगा ।कलयुग में बलवान को ही न्याय मिलेगापराक्रमी भगवान विष्णु कल्कि अवतार लेंगे और विनाश करेंगे और पृथ्वी के चेहरे से पापियों और राक्षसों को नष्ट कर देंगे । इस प्रकार श्रीकृष्ण ने महाभारत में वर्णित किया कि कलयुग का अंत कैसे होगा । तदनुसार जो दोगली बात कहते हैं और पाप कार्य करते हैं वे इस कलियुग में राज्य करते हैं । कलियुग के बच्चों के लिए माता-पिता का प्यार इतना ज्यादा है कि लाड़ प्यार के कारण उनका अपना विकास रुक जायेगा ।कलयुग का कड़वा सच जिसमे फसल और पानी भी चोरी होंगेकलयुग का कड़वा सच यह है कि इस युग में लोग पानी पीने का सामन तक चोरी करेंगे। कलयुग के अंत के समय बड़े बड़े भयंकर युद्ध होंगे । भारी वर्षा और जोरों की गर्मी पड़ेगी। लोग खेती काट लेंगे, कपड़े चुरा लेंगे । पानी पीने का सामान और पेटियां भी चुरा ले जाएँगे । चोर अपने ही जैसे चोरों की संपत्ति चुराने लगेंगे । हत्यारों की भी हत्या होने लगेगी । चोरों से ही चोरों का नाश हो जाने के कारण जनता का कल्याण होगा ।युगांत काल में मनुष्य की आयु अधिक से अधिक बारह वर्ष की रह जाएगी । लोग दुर्बल, क्रोध, रोग तथा बुढ़ापे और शोक से ग्रसित होंगे । उस समय रोगों के कारण इंद्रिया कमजोर हो जाएगी । भगवान कहते हैं इसके बाद कलयुग में जब पाप अपने चरम पर पहुंच जाएगा और पृथ्वी से धर्म समाप्त होने लगेगा तब मैं कल्कि के रूप में अवतरित होकर इस पृथ्वी को पापों से मुक्त करूँगा और उसके बाद जो नया युग आएगा वो सत्युग कहलाएगा ।कलयुग का कड़वा सच जिसमे नयी नयी बीमारियां जन्म लेंगीमित्रो पूरी दुनिया में कोरोनाविषाणू से हाहाकार मची हुई है, कुछ समय पहले तो हालत और भी ज्यादा गंभीर थे । ऐसे में अधिकतर लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि क्या हिन्दू धर्म शास्त्रों में की गई भविष्यवाणी के अनुसार कलयुग के अंत का समय निकट आ चुका है ।क्योंकि सोशल मीडिया पर कई लोग ये दावा कर रहे हैं कि आज से करीब दस हजार साल पहले लिखे गए कुछ हिंदू धर्मग्रंथों में इस बात का वर्णन मिला है कि पूर्व के देश से कोई महामारी जन्म लेगी जो पूरे विश्व को तबाह कर देगी । लेकिन मित्रो घबराने की जरुरत नहीं है ।धार्मिक ग्रंथों की आज के समय में चल रहे कोरोनाविषाणू पर क्या टिप्पणी है? उसे समझते है। तो मित्रो आपने देखा ही होगा कि सोशल मीडिया पर कई ज्योतिष के जानकारों का विडियो वायरल हो रहा है जिसमें ये दावा किया जा रहा है कि हिंदू धर्मग्रंथों में से एक नारद संहिता में आज से करीब दस हजार साल पहले इस बात का उल्लेख किया जा चुका है कि भारत के पूर्व की ओर बसे किसी देश से महामारी की शुरुआत होगी जिस से पूरी दुनिया तबाह हो जाएगी ।कलियुग का अंत होने मे अभी लगभग चार लाख सत्ताईस हजार साल बाकी हैंपर दोस्तों घबराने की जरूरत नहीं है कलियुग की उम्र चार आँख बत्त्तीस हजार साल है और अभी कलियुग के सिर्फ पाँच हजार एक सौ बीस वर्ष ही बीते हैं। पर दोस्तो इतना सब पड़ने के बाद कोई भी घोर कलियुग में जन्म नही लेना चाहेगा परन्तु जब तक हम भगवान के भक्त नहीं बनते तब तक हमें मजबूर होकर जन्म लेना ही पड़ता है। दोस्तो उम्मीद है आपको पोस्ट पसंद आयी होगी और अगर पसंद आयी हो तो इसे शेयर जरूर करें। व्हाट्सप्प ग्रुप ज्वाइन करने के लिए यहाँ क्लिक करें ताकि आपको अगली पोस्ट की जानकारी मिल सके। शेयर करने के लिए निचे दीये गए बटनों का इस्तेमाल करें। शुक्रिया !

कलयुग का कड़वा सच – लड़कियों का अपने ही घर में शोषण होगा।


कलयुग का कड़वा सच

आपको बता दें कि इस कलियुग में लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं। कलियुग का कड़वा सच है कि लड़कियों का अपना परिवार उनके साथ व्यभिचार करेगा और इस कलयुग में तो लोगों की फसल और पानी भी चोरी हो जायेंगे । हिंदू धार्मिक ग्रंथों में दी गई जानकारी के अनुसार कलियुग के अंत में अभी काफी समय बाकी है। क्योंकि, ब्रह्मपुराण के अनुसार, कलियुग की आयु उनकी 43,200 वर्ष है और कलियुग अभी शुरू हो रहा है। , जिसका पहला चरण चल रहा है।

माना जाता है कि कलियुग की शुरुआत 302 ईशा पूर्व हुई थी । इसका अर्थ यह हुआ कि कलियुग को अभी 5,120 वर्ष ही हुए हैं और कलियुग में 4,26,888 वर्ष शेष हैं, लेकिन ब्रह्मप्राण में कलियुग के अंत की व्याख्या कैसे की गई है? ब्रह्मपुराण के अनुसार, कलियुग के अंत में मानव आयु केवल 12 वर्ष की बताई गयी है । इस दौरान लोगों में नफरत और नाराजगी बढ़ जाती है ।

कलियुग मे मानवता बिलुप्त हो जाएगी

कलयुग का कड़वा सच है कि जैसे जैसे कलयुग की उम्र बढ़ती जाएगी वैसे वैसे नदियां सूखती जाएगी । बेइमानी और अन्याय से धन कमाने वाले लोगों में बढ़ोत्तरी होगी । धन के लोभ में मनुष्य किसी की हत्या करने में भी संकोच नहीं करेगा। मनुष्य पूजा पाठ, व्रत, उपवास और सभी धार्मिक कार्य करना बंद कर देंगे । गाय दूध देना बंद कर देगी । मानवता नष्ट हो जाएगी ।

लड़कियां बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं रहेंगी। उनका अपने ही घर में शोषण होगा । कलयुग का कड़वा सच है कि अपने ही घर के लोग उनके साथ क्या व्यभिचार करेंगे । बाप बेटी का भाई बहन का कोई रिश्ता नहीं रह जाएगा । एक भाई दूसरे भाई का ही शत्रु हो जाएगा । शादी जैसा पवित्र रिश्ता अपवित्र हो जाएगा । किसी की भी शादी शुदा जिंदगी ठीक से नहीं चलेगी । पति पत्नी एक दूसरे से बेवफाई करेंगे । कलयुग में समाज हिंसक हो जाएगा ।

कलयुग में बलवान को ही न्याय मिलेगा

पराक्रमी भगवान विष्णु कल्कि अवतार लेंगे और विनाश करेंगे और पृथ्वी के चेहरे से पापियों और राक्षसों को नष्ट कर देंगे । इस प्रकार श्रीकृष्ण ने महाभारत में वर्णित किया कि कलयुग का अंत कैसे होगा । तदनुसार जो दोगली बात कहते हैं और पाप कार्य करते हैं वे इस कलियुग में राज्य करते हैं । कलियुग के बच्चों के लिए माता-पिता का प्यार इतना ज्यादा है कि लाड़ प्यार के कारण उनका अपना विकास रुक जायेगा ।

कलयुग का कड़वा सच जिसमे फसल और पानी भी चोरी होंगे

कलयुग का कड़वा सच यह है कि इस युग में लोग पानी पीने का सामन तक चोरी करेंगे। कलयुग के अंत के समय बड़े बड़े भयंकर युद्ध होंगे । भारी वर्षा और जोरों की गर्मी पड़ेगी। लोग खेती काट लेंगे, कपड़े चुरा लेंगे । पानी पीने का सामान और पेटियां भी चुरा ले जाएँगे । चोर अपने ही जैसे चोरों की संपत्ति चुराने लगेंगे । हत्यारों की भी हत्या होने लगेगी । चोरों से ही चोरों का नाश हो जाने के कारण जनता का कल्याण होगा ।

युगांत काल में मनुष्य की आयु अधिक से अधिक बारह वर्ष की रह जाएगी । लोग दुर्बल, क्रोध, रोग तथा बुढ़ापे और शोक से ग्रसित होंगे । उस समय रोगों के कारण इंद्रिया कमजोर हो जाएगी । भगवान कहते हैं इसके बाद कलयुग में जब पाप अपने चरम पर पहुंच जाएगा और पृथ्वी से धर्म समाप्त होने लगेगा तब मैं कल्कि के रूप में अवतरित होकर इस पृथ्वी को पापों से मुक्त करूँगा और उसके बाद जो नया युग आएगा वो सत्युग कहलाएगा ।

कलयुग का कड़वा सच जिसमे नयी नयी बीमारियां जन्म लेंगी

मित्रो पूरी दुनिया में कोरोनाविषाणू से हाहाकार मची हुई है, कुछ समय पहले तो हालत और भी ज्यादा गंभीर थे । ऐसे में अधिकतर लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि क्या हिन्दू धर्म शास्त्रों में की गई भविष्यवाणी के अनुसार कलयुग के अंत का समय निकट आ चुका है ।

क्योंकि सोशल मीडिया पर कई लोग ये दावा कर रहे हैं कि आज से करीब दस हजार साल पहले लिखे गए कुछ हिंदू धर्मग्रंथों में इस बात का वर्णन मिला है कि पूर्व के देश से कोई महामारी जन्म लेगी जो पूरे विश्व को तबाह कर देगी । लेकिन मित्रो घबराने की जरुरत नहीं है ।

धार्मिक ग्रंथों की आज के समय में चल रहे कोरोनाविषाणू पर क्या टिप्पणी है? उसे समझते है। तो मित्रो आपने देखा ही होगा कि सोशल मीडिया पर कई ज्योतिष के जानकारों का विडियो वायरल हो रहा है जिसमें ये दावा किया जा रहा है कि हिंदू धर्मग्रंथों में से एक नारद संहिता में आज से करीब दस हजार साल पहले इस बात का उल्लेख किया जा चुका है कि भारत के पूर्व की ओर बसे किसी देश से महामारी की शुरुआत होगी जिस से पूरी दुनिया तबाह हो जाएगी ।

कलियुग का अंत होने मे अभी लगभग चार लाख सत्ताईस हजार साल बाकी हैं

पर दोस्तों घबराने की जरूरत नहीं है कलियुग की उम्र चार आँख बत्त्तीस हजार साल है और अभी कलियुग के सिर्फ पाँच हजार एक सौ बीस वर्ष ही बीते हैं। पर दोस्तो इतना सब पड़ने के बाद कोई भी घोर कलियुग में जन्म नही लेना चाहेगा परन्तु जब तक हम भगवान के भक्त नहीं बनते तब तक हमें मजबूर होकर जन्म लेना ही पड़ता है। दोस्तो उम्मीद है आपको पोस्ट पसंद आयी होगी और अगर पसंद आयी हो तो इसे शेयर जरूर करें। व्हाट्सप्प ग्रुप ज्वाइन करने के लिए यहाँ क्लिक करें ताकि आपको अगली पोस्ट की जानकारी मिल सके। शेयर करने के लिए निचे दीये गए बटनों का इस्तेमाल करें। शुक्रिया !


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🚩🌺🪴गीता ज्ञान🪴🌺🚩 महाराज युधिस्ठिर ने बताया जीवन का सबसे बड़ा क्या है By वनिता कासनियां पंजाब , यूँ तो हम सब जानते ही हैं कि आश्चर्य किसे कहते हैं लेकिन आप में से बहुत लोग शायद ना जानते हों की जीवन का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?, महाराज युधिस्ठिर के अनुसार जीवन का सबसे बड़ा आश्चर्य है अमर बनने की इच्छा । महाराज युधिस्ठिर के यक्ष को जवाब एक बार की बात है महाराज युधिस्ठिर अज्ञातवाश के समय वन में सभी पांडवों के साथ थे । जंगल में घूमते घूमते सभी पांडवों को प्यास लगने लगी । महाराज युधिस्ठिर ने एक एक करके सभी पांडवों को पानी लाने के लिए भेजा । सभी पानी लेने के लिए तो गए लेकिन वापिस लौटकर कोई भी नहीं आया । तब महाराज युधिष्ठिर ने स्वंय पांडवों को ढूढ़ने का प्रयास किया । जब महाराज युधिष्ठिर एक सरोवर के पास गए तो उन्होंने देखा कि सारे पांडव वहां बेहोस पड़े हुए हैं । महाराज युधिष्ठिर ने सोचा कि पांडवों की खबर बाद में लेते हैं पहले क्यों न सरोवर से कुछ पानी ही पी लिया जाये । जैसे ही महाराज युधिष्ठिर सरोवर से पानी पीने लगे तो वहां एक आवाज आयी जिसने उन्हें पानी पीने से रोक दिया । वह आवाज दरअसल यक्ष की थी जो उस सरोवर की रखवाली किया करते थे । यक्ष ने महाराज युधिष्ठिर को पानी पीने से रक दिया और उनके सामने एक शर्त रखी । यक्ष ने कहा कि अगर महाराज युधिष्ठिर उनके सवालों का जवाब दे देंगे तो वह सरोवर से पानी पी सकते हैं नहीं तो वो भी अपने भाइयों की तरह ही मृत्यु को प्राप्त हो जायेंगे । महाराज युधिष्ठिर ने यक्ष की शर्त मंजूर कर ली और यक्ष एक एक करके महाराज युधिष्ठिर से सवाल पूछने लगे । उन्होंने पहला सवाल पुछा कि वायु से भी तेज क्या है तो महाराज युधिष्ठिर ने जवाब दिया कि वायु से भी तेज मन है । वायु को तो एक जगह से दूसरी जगह तक पहुँचने में कुछ वक्त लगता है लेकिन मन तो कहीं भी बिना वक्त लगाए ही पहुचन सकता है । जैसे कि आप एक बार ताज महल देख कर आये हैं और दोबारा ताजमहल देखना चाहते हैं तो आपको वहां जाना पड़ेगा लेकिन मन में ताजमहल की तस्वीर तुरंत ही उभर कर आ जाएगी । इसी क्रम से सवाल पूछते हुए कहा की आकाश से भी ऊँचा कौन होता है तो महाराज युधिष्ठिर ने कहा कि पिता का साया आकाश से भी ऊँचा होता है । धरती से भी भारी कौन है पूछने पर महाराज युधिष्ठिर ने माता को धरती से भी भरी बताया । इसी क्रम से आगे बढ़ते हुए यक्ष ने पुछा कि सूर्य किस की आज्ञा से उदय होता है तो महाराज युधिष्ठिर ने कहा कि भगवान की आज्ञा से । विदेश जाने वाले का साथी कौन है पूछने पर बिद्या को विदेश जाने वाले का साथी बताया । इसी क्रम से जब यक्ष ने महाराज युधिष्ठिर से पुछा की जीवन का सबसे बड़ा अस्चर्य क्या है तो उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा आश्चर्य तो यही है कि रोज लोग एक दुसरे को मरते हुए देखते हैं लेकिन सोचते हैं कि वो कभी नहीं मरेंगे और हमशा जीने की इच्छा रखते हैं । लोग देखते हैं कि मेरे आस पड़ोस वाले सभी एक एक करके मर रहे हैं और फिर भी वह सोचते हैं कि उन्हें कभी नहीं मरना पड़ेगा यही जीवन का सबसे बड़ा आश्चर्य है । महाराज युधिस्ठिर ने अपनी सूझबूझ से किया अपने भाईयों को जीवित जब महाराज युधिस्ठिर ने यक्ष के सारे सवालों का सही सही जवाब दे दिया तो वे बड़े प्रसन्न हुए और उन्होंने महाराज युधिस्ठिर से वरदान मांगने को कहा । महाराज युधिस्ठिर ने अपने भाइयों को जीवित कर देने का वरदान यक्ष से माँगा । यक्ष ने कहा कि वह केवल दो भाईओं को ही जीवित कर सकते हैं । आपको यह जानकर हैरानी होsगी कि महाराज युधिस्ठिर ने ये जानते हुए भी कि भीम और अर्जुन युद्ध जीतने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं उन दोनों को जीवित नहीं किया । महाराज युधिस्ठिर जानते थे कि आने वाले समय में महाभारत का युद्ध होने वाला है और अगर वो भीम और अर्जुन को जीवित नहीं करेंगे तो वे युद्ध नहीं जीत सकते । दरअसल भीम, अर्जुन और महाराज युधिस्ठिर माता कुंती के पुत्र थे और नकुल और सहदेव माता माधवी के पुत्र थे । इसलिए महाराज युधिस्ठिर ने सोचा कि अगर एक पुत्र माता कुंती के जीवित बचते हैं और एक पुत्र माधवी के तो यह न्याय पूर्ण होगा और अगर भीम और अर्जुन जीवित बच गए लेकिन माता माधवी के दोनों पुत्र मारे गए तो यह अन्याय होगा । महाराज युधिस्ठिर ने न्याय और धर्म की रक्षा के लिए आने वाली युद्ध में होने वाली जीत को भी डाव पर लगा दिया महाराज युधिस्ठिर को धर्मराज कहा जाता है और उन्होंने यहाँ यह साबित कर दिया कि वे धर्म को सबसे बड़ा मानते हैं । यक्ष महाराज युधिस्ठिर का न्याय देखकर बहुत ही ज्यादा प्रभावित हुए और उन्होंने पांचो पांडवों को फिर से जीवित कर दिया । लोग अमर क्यों होना चाहते हैं? महाराज युधिष्ठिर के अनुसार अमर होने की इच्छा ही इस दुनिया में सबसे बड़ा आश्चर्य है । फिर भी न जाने लोग अमर क्यों होना चाहते हैं? इसका कारण शास्त्रों में बताय गया है कि सारे जीव भगवान के अंश स्वरूप ही हैं । क्योंकि भगवान अमर हैं इसलिए हम भी अमर होना चाहते हैं । अमर होना इस जगत में संभव नहीं है क्योंकि इस भौतिक जगत को नश्वर बताया गया है । इस जगत में जिसने भी जन्म लिया है उसकी मृत्यु होना निश्चित है । अमर होने की इच्छा रखने का एक कारण यह भी है कि लोग मरने से डरते हैं इसलिए वे अमर होना चाहते हैं । प्राचीन काल में कई राक्षस रहे हैं जो अमर होने के लिए शिव जी की तपस्या किया करते थे लेकिन आज तक कोई भी अमर नहीं हो पाया । पृथ्वी लोक की तो बात ही जाने दें क्योंकि स्वर्ग लोक में भी कोई अमर नहीं है । तो मित्रो केसा लगा आपको आज का यह पोस्ट । इसी तरह की अध्यात्मिक कहानियाँ पड़ते रहने के लिए हमारा व्हाटसप्प् ग्रुप जॉइन करें । जॉइन करने के लिए यहाँ क्लिक

🚩🌺🪴गीता ज्ञान🪴🌺🚩 महाराज युधिस्ठिर ने बताया जीवन का सबसे बड़ा क्या है   By  वनिता कासनियां पंजाब  , यूँ तो हम सब जानते ही हैं कि आश्चर्य किसे कहते हैं लेकिन आप में से बहुत लोग शायद ना जानते हों की जीवन का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?, महाराज युधिस्ठिर के अनुसार जीवन का सबसे बड़ा आश्चर्य है अमर बनने की इच्छा । महाराज युधिस्ठिर के यक्ष को जवाब एक बार की बात है महाराज युधिस्ठिर अज्ञातवाश के समय वन में सभी पांडवों के साथ थे । जंगल में घूमते घूमते सभी पांडवों को प्यास लगने लगी । महाराज युधिस्ठिर ने एक एक करके सभी पांडवों को पानी लाने के लिए भेजा । सभी पानी लेने के लिए तो गए लेकिन वापिस लौटकर कोई भी नहीं आया । तब महाराज युधिष्ठिर ने स्वंय पांडवों को ढूढ़ने का प्रयास किया । जब महाराज युधिष्ठिर एक सरोवर के पास गए तो उन्होंने देखा कि सारे पांडव वहां बेहोस पड़े हुए हैं । महाराज युधिष्ठिर ने सोचा कि पांडवों की खबर बाद में लेते हैं पहले क्यों न सरोवर से कुछ पानी ही पी लिया जाये । जैसे ही महाराज युधिष्ठिर सरोवर से पानी पीने लगे तो वहां एक आवाज आयी जिसने उन्हें पानी पीने से रोक दिया । वह...
राष्ट्र हिंदू धर्म में वार हनुमान को किन देवताओं से क्या वरदान मिले?  हम सभी हनुमान जी द्वारा बचपन में सूर्यदेव को एक फल समझ कर खाने के प्रयास के विषय में जानते हैं। उस समय हनुमान मारुति के नाम से जाने जाते थे। बालपन में ही उन्होंने सूर्यदेव को फल समझ कर निगलना चाहा। जब देवराज इंद्र ने ये देखा तो उन्होंने सूर्य की रक्षा के लिए मारुति पर अपने वज्र से प्रहार किया। इंद्र के वज्र के प्रहार से मारुति की ठुड्डी टूट गयी और वे अचेत होकर पृथ्वी पर आ गिरे। जब पवनदेव ने ये देखा कि इंद्र देव ने उनके धर्मपुत्र पर प्रहार किया है तो उन्होंने संसार से प्राणवायु खींच ली। इससे समस्त प्राणी मृत्यु के निकट पहुँच गए। ऐसा देख कर परमपिता ब्रह्मा स्वयं वहां पहुंचे और उन्होंने पवनदेव को प्राणवायु लौटने का आदेश दिया ताकि सृष्टि सुचारु रूप से चल सके। उन्होंने ये भी समझाया कि सूर्य नवग्रहों के प्रमुख हैं और यदि उनका अहित होता तो समस्त पृथ्वी का संतुलन बिगड़ जाता। इसी कारण इंद्र द्वारा उनकी रक्षा का जो उपाय किया गया वो आवश्यक था। ये सुनकर पवनदेव ने ब्रह्माजी से प्रार्थना की कि पहले वे उनके पुत्र के प्राण बचाएं।...