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कलयुग का कड़वा सच – लड़कियों का अपने ही घर में शोषण होगा। By वनिता कासनियां पंजाब=कलयुग का कड़वा सचआपको बता दें कि इस कलियुग में लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं। कलियुग का कड़वा सच है कि लड़कियों का अपना परिवार उनके साथ व्यभिचार करेगा और इस कलयुग में तो लोगों की फसल और पानी भी चोरी हो जायेंगे । हिंदू धार्मिक ग्रंथों में दी गई जानकारी के अनुसार कलियुग के अंत में अभी काफी समय बाकी है। क्योंकि, ब्रह्मपुराण के अनुसार, कलियुग की आयु उनकी 43,200 वर्ष है और कलियुग अभी शुरू हो रहा है। , जिसका पहला चरण चल रहा है।माना जाता है कि कलियुग की शुरुआत 302 ईशा पूर्व हुई थी । इसका अर्थ यह हुआ कि कलियुग को अभी 5,120 वर्ष ही हुए हैं और कलियुग में 4,26,888 वर्ष शेष हैं, लेकिन ब्रह्मप्राण में कलियुग के अंत की व्याख्या कैसे की गई है? ब्रह्मपुराण के अनुसार, कलियुग के अंत में मानव आयु केवल 12 वर्ष की बताई गयी है । इस दौरान लोगों में नफरत और नाराजगी बढ़ जाती है ।कलियुग मे मानवता बिलुप्त हो जाएगीकलयुग का कड़वा सच है कि जैसे जैसे कलयुग की उम्र बढ़ती जाएगी वैसे वैसे नदियां सूखती जाएगी । बेइमानी और अन्याय से धन कमाने वाले लोगों में बढ़ोत्तरी होगी । धन के लोभ में मनुष्य किसी की हत्या करने में भी संकोच नहीं करेगा। मनुष्य पूजा पाठ, व्रत, उपवास और सभी धार्मिक कार्य करना बंद कर देंगे । गाय दूध देना बंद कर देगी । मानवता नष्ट हो जाएगी ।लड़कियां बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं रहेंगी। उनका अपने ही घर में शोषण होगा । कलयुग का कड़वा सच है कि अपने ही घर के लोग उनके साथ क्या व्यभिचार करेंगे । बाप बेटी का भाई बहन का कोई रिश्ता नहीं रह जाएगा । एक भाई दूसरे भाई का ही शत्रु हो जाएगा । शादी जैसा पवित्र रिश्ता अपवित्र हो जाएगा । किसी की भी शादी शुदा जिंदगी ठीक से नहीं चलेगी । पति पत्नी एक दूसरे से बेवफाई करेंगे । कलयुग में समाज हिंसक हो जाएगा ।कलयुग में बलवान को ही न्याय मिलेगापराक्रमी भगवान विष्णु कल्कि अवतार लेंगे और विनाश करेंगे और पृथ्वी के चेहरे से पापियों और राक्षसों को नष्ट कर देंगे । इस प्रकार श्रीकृष्ण ने महाभारत में वर्णित किया कि कलयुग का अंत कैसे होगा । तदनुसार जो दोगली बात कहते हैं और पाप कार्य करते हैं वे इस कलियुग में राज्य करते हैं । कलियुग के बच्चों के लिए माता-पिता का प्यार इतना ज्यादा है कि लाड़ प्यार के कारण उनका अपना विकास रुक जायेगा ।कलयुग का कड़वा सच जिसमे फसल और पानी भी चोरी होंगेकलयुग का कड़वा सच यह है कि इस युग में लोग पानी पीने का सामन तक चोरी करेंगे। कलयुग के अंत के समय बड़े बड़े भयंकर युद्ध होंगे । भारी वर्षा और जोरों की गर्मी पड़ेगी। लोग खेती काट लेंगे, कपड़े चुरा लेंगे । पानी पीने का सामान और पेटियां भी चुरा ले जाएँगे । चोर अपने ही जैसे चोरों की संपत्ति चुराने लगेंगे । हत्यारों की भी हत्या होने लगेगी । चोरों से ही चोरों का नाश हो जाने के कारण जनता का कल्याण होगा ।युगांत काल में मनुष्य की आयु अधिक से अधिक बारह वर्ष की रह जाएगी । लोग दुर्बल, क्रोध, रोग तथा बुढ़ापे और शोक से ग्रसित होंगे । उस समय रोगों के कारण इंद्रिया कमजोर हो जाएगी । भगवान कहते हैं इसके बाद कलयुग में जब पाप अपने चरम पर पहुंच जाएगा और पृथ्वी से धर्म समाप्त होने लगेगा तब मैं कल्कि के रूप में अवतरित होकर इस पृथ्वी को पापों से मुक्त करूँगा और उसके बाद जो नया युग आएगा वो सत्युग कहलाएगा ।कलयुग का कड़वा सच जिसमे नयी नयी बीमारियां जन्म लेंगीमित्रो पूरी दुनिया में कोरोनाविषाणू से हाहाकार मची हुई है, कुछ समय पहले तो हालत और भी ज्यादा गंभीर थे । ऐसे में अधिकतर लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि क्या हिन्दू धर्म शास्त्रों में की गई भविष्यवाणी के अनुसार कलयुग के अंत का समय निकट आ चुका है ।क्योंकि सोशल मीडिया पर कई लोग ये दावा कर रहे हैं कि आज से करीब दस हजार साल पहले लिखे गए कुछ हिंदू धर्मग्रंथों में इस बात का वर्णन मिला है कि पूर्व के देश से कोई महामारी जन्म लेगी जो पूरे विश्व को तबाह कर देगी । लेकिन मित्रो घबराने की जरुरत नहीं है ।धार्मिक ग्रंथों की आज के समय में चल रहे कोरोनाविषाणू पर क्या टिप्पणी है? उसे समझते है। तो मित्रो आपने देखा ही होगा कि सोशल मीडिया पर कई ज्योतिष के जानकारों का विडियो वायरल हो रहा है जिसमें ये दावा किया जा रहा है कि हिंदू धर्मग्रंथों में से एक नारद संहिता में आज से करीब दस हजार साल पहले इस बात का उल्लेख किया जा चुका है कि भारत के पूर्व की ओर बसे किसी देश से महामारी की शुरुआत होगी जिस से पूरी दुनिया तबाह हो जाएगी ।कलियुग का अंत होने मे अभी लगभग चार लाख सत्ताईस हजार साल बाकी हैंपर दोस्तों घबराने की जरूरत नहीं है कलियुग की उम्र चार आँख बत्त्तीस हजार साल है और अभी कलियुग के सिर्फ पाँच हजार एक सौ बीस वर्ष ही बीते हैं। पर दोस्तो इतना सब पड़ने के बाद कोई भी घोर कलियुग में जन्म नही लेना चाहेगा परन्तु जब तक हम भगवान के भक्त नहीं बनते तब तक हमें मजबूर होकर जन्म लेना ही पड़ता है। दोस्तो उम्मीद है आपको पोस्ट पसंद आयी होगी और अगर पसंद आयी हो तो इसे शेयर जरूर करें। व्हाट्सप्प ग्रुप ज्वाइन करने के लिए यहाँ क्लिक करें ताकि आपको अगली पोस्ट की जानकारी मिल सके। शेयर करने के लिए निचे दीये गए बटनों का इस्तेमाल करें। शुक्रिया !

कलयुग का कड़वा सच – लड़कियों का अपने ही घर में शोषण होगा।


कलयुग का कड़वा सच

आपको बता दें कि इस कलियुग में लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं। कलियुग का कड़वा सच है कि लड़कियों का अपना परिवार उनके साथ व्यभिचार करेगा और इस कलयुग में तो लोगों की फसल और पानी भी चोरी हो जायेंगे । हिंदू धार्मिक ग्रंथों में दी गई जानकारी के अनुसार कलियुग के अंत में अभी काफी समय बाकी है। क्योंकि, ब्रह्मपुराण के अनुसार, कलियुग की आयु उनकी 43,200 वर्ष है और कलियुग अभी शुरू हो रहा है। , जिसका पहला चरण चल रहा है।

माना जाता है कि कलियुग की शुरुआत 302 ईशा पूर्व हुई थी । इसका अर्थ यह हुआ कि कलियुग को अभी 5,120 वर्ष ही हुए हैं और कलियुग में 4,26,888 वर्ष शेष हैं, लेकिन ब्रह्मप्राण में कलियुग के अंत की व्याख्या कैसे की गई है? ब्रह्मपुराण के अनुसार, कलियुग के अंत में मानव आयु केवल 12 वर्ष की बताई गयी है । इस दौरान लोगों में नफरत और नाराजगी बढ़ जाती है ।

कलियुग मे मानवता बिलुप्त हो जाएगी

कलयुग का कड़वा सच है कि जैसे जैसे कलयुग की उम्र बढ़ती जाएगी वैसे वैसे नदियां सूखती जाएगी । बेइमानी और अन्याय से धन कमाने वाले लोगों में बढ़ोत्तरी होगी । धन के लोभ में मनुष्य किसी की हत्या करने में भी संकोच नहीं करेगा। मनुष्य पूजा पाठ, व्रत, उपवास और सभी धार्मिक कार्य करना बंद कर देंगे । गाय दूध देना बंद कर देगी । मानवता नष्ट हो जाएगी ।

लड़कियां बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं रहेंगी। उनका अपने ही घर में शोषण होगा । कलयुग का कड़वा सच है कि अपने ही घर के लोग उनके साथ क्या व्यभिचार करेंगे । बाप बेटी का भाई बहन का कोई रिश्ता नहीं रह जाएगा । एक भाई दूसरे भाई का ही शत्रु हो जाएगा । शादी जैसा पवित्र रिश्ता अपवित्र हो जाएगा । किसी की भी शादी शुदा जिंदगी ठीक से नहीं चलेगी । पति पत्नी एक दूसरे से बेवफाई करेंगे । कलयुग में समाज हिंसक हो जाएगा ।

कलयुग में बलवान को ही न्याय मिलेगा

पराक्रमी भगवान विष्णु कल्कि अवतार लेंगे और विनाश करेंगे और पृथ्वी के चेहरे से पापियों और राक्षसों को नष्ट कर देंगे । इस प्रकार श्रीकृष्ण ने महाभारत में वर्णित किया कि कलयुग का अंत कैसे होगा । तदनुसार जो दोगली बात कहते हैं और पाप कार्य करते हैं वे इस कलियुग में राज्य करते हैं । कलियुग के बच्चों के लिए माता-पिता का प्यार इतना ज्यादा है कि लाड़ प्यार के कारण उनका अपना विकास रुक जायेगा ।

कलयुग का कड़वा सच जिसमे फसल और पानी भी चोरी होंगे

कलयुग का कड़वा सच यह है कि इस युग में लोग पानी पीने का सामन तक चोरी करेंगे। कलयुग के अंत के समय बड़े बड़े भयंकर युद्ध होंगे । भारी वर्षा और जोरों की गर्मी पड़ेगी। लोग खेती काट लेंगे, कपड़े चुरा लेंगे । पानी पीने का सामान और पेटियां भी चुरा ले जाएँगे । चोर अपने ही जैसे चोरों की संपत्ति चुराने लगेंगे । हत्यारों की भी हत्या होने लगेगी । चोरों से ही चोरों का नाश हो जाने के कारण जनता का कल्याण होगा ।

युगांत काल में मनुष्य की आयु अधिक से अधिक बारह वर्ष की रह जाएगी । लोग दुर्बल, क्रोध, रोग तथा बुढ़ापे और शोक से ग्रसित होंगे । उस समय रोगों के कारण इंद्रिया कमजोर हो जाएगी । भगवान कहते हैं इसके बाद कलयुग में जब पाप अपने चरम पर पहुंच जाएगा और पृथ्वी से धर्म समाप्त होने लगेगा तब मैं कल्कि के रूप में अवतरित होकर इस पृथ्वी को पापों से मुक्त करूँगा और उसके बाद जो नया युग आएगा वो सत्युग कहलाएगा ।

कलयुग का कड़वा सच जिसमे नयी नयी बीमारियां जन्म लेंगी

मित्रो पूरी दुनिया में कोरोनाविषाणू से हाहाकार मची हुई है, कुछ समय पहले तो हालत और भी ज्यादा गंभीर थे । ऐसे में अधिकतर लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि क्या हिन्दू धर्म शास्त्रों में की गई भविष्यवाणी के अनुसार कलयुग के अंत का समय निकट आ चुका है ।

क्योंकि सोशल मीडिया पर कई लोग ये दावा कर रहे हैं कि आज से करीब दस हजार साल पहले लिखे गए कुछ हिंदू धर्मग्रंथों में इस बात का वर्णन मिला है कि पूर्व के देश से कोई महामारी जन्म लेगी जो पूरे विश्व को तबाह कर देगी । लेकिन मित्रो घबराने की जरुरत नहीं है ।

धार्मिक ग्रंथों की आज के समय में चल रहे कोरोनाविषाणू पर क्या टिप्पणी है? उसे समझते है। तो मित्रो आपने देखा ही होगा कि सोशल मीडिया पर कई ज्योतिष के जानकारों का विडियो वायरल हो रहा है जिसमें ये दावा किया जा रहा है कि हिंदू धर्मग्रंथों में से एक नारद संहिता में आज से करीब दस हजार साल पहले इस बात का उल्लेख किया जा चुका है कि भारत के पूर्व की ओर बसे किसी देश से महामारी की शुरुआत होगी जिस से पूरी दुनिया तबाह हो जाएगी ।

कलियुग का अंत होने मे अभी लगभग चार लाख सत्ताईस हजार साल बाकी हैं

पर दोस्तों घबराने की जरूरत नहीं है कलियुग की उम्र चार आँख बत्त्तीस हजार साल है और अभी कलियुग के सिर्फ पाँच हजार एक सौ बीस वर्ष ही बीते हैं। पर दोस्तो इतना सब पड़ने के बाद कोई भी घोर कलियुग में जन्म नही लेना चाहेगा परन्तु जब तक हम भगवान के भक्त नहीं बनते तब तक हमें मजबूर होकर जन्म लेना ही पड़ता है। दोस्तो उम्मीद है आपको पोस्ट पसंद आयी होगी और अगर पसंद आयी हो तो इसे शेयर जरूर करें। व्हाट्सप्प ग्रुप ज्वाइन करने के लिए यहाँ क्लिक करें ताकि आपको अगली पोस्ट की जानकारी मिल सके। शेयर करने के लिए निचे दीये गए बटनों का इस्तेमाल करें। शुक्रिया !


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🌹🪴गीता ज्ञान🪴🌹कटप्पा – महान भक्त, जिन्होंने अपनी दोनों आँखें भेंट दे दीं By वनिता कासनियां पंजाब. कटप्पा दोस्तों आप लोगों ने बाहुबली फिल्म जरूर देखी होगी । उसमे बताया गया है कि किस तरह एक राज्य के वफादार कटप्पा ने बाहुबली के मर जाने के बाद भी शाशन का साथ निभाया । दोस्तों क्या आप जानते हैं कि आखिर यह कटप्पा नाम शास्त्रों में कहाँ से लिया गया है । चलिए आपको बताते हैं।गीता ज्ञानआज हम कटप्पा नाम के एक व्यक्ति के बारे में जानेंगे और जानेंगे कि उसने भगवान शिव को मांस का टुकड़ा और अपनी आँखें समर्पित क्यों कीं थी । कटप्पा का जन्म कालहस्ती के पास उदयपुर में एक शिकारी परिवार में हुआ था । वर्तमान के उदयपुर में जिसे उस समय उत्तर कुरु के नाम से जाना जाता था । आंध्र प्रदेश के राजमपेट में कटप्पा एक धनुर्धर एक दिन शिकार करने गया लेकिन जंगल में उन्हें एक मंदिर मिला जिसमें शिवलिंग था ।कटप्पा भगवान शिव के भक्त थे और वह भगवान शिव को कुछ देना चाहते थे परंतु वह यह नहीं समझ पा रहे थे कि शिव को भेंट कैसे और किस प्रलकार से करें । फिर उन्होंने मांस का एक टुकड़ा भेंट देने का विचार किया जो उन्हें शिकार करने से मिला था और मासूमियत से शिवलिंग पर मांस का टुकड़ा चढ़ा दिया और खुशी से यह विश्वास करते हुए चले गए कि भगवान शिव ने उनकी भेंट स्वीकार कर ली होगी ।मंदिर की देखभाल एक ब्राह्मण करता था जो मंदिर से बहुत दूर रहता था । अगले दिन जब ब्राह्मण वहाँ पहुँचा तो शिवलिंग के बगल में मांस पड़ा हुआ देखकर दंग रह गया । लेकिन फिर उन्होंने यह सोचकर अपने मन को शांत किया कि यह किसी जानवर का काम होगा और उन्होंने मंदिर की सफाई की और अपने दैनिक अनुष्ठान किए और चले गए ।कटप्पा प्रतिदिन श्रद्धा भाव से पूजा पाठ करने लगेगाँव में कटप्पा अपने तरीके से शिवलिंग की पूजा करता था । वह शिकार के बाद शिवलिंग को देखने और उससे बात करने के लिए प्रतिदिन मंदिर जाता था और अपनी श्रद्धा भावना में मांस चढ़ाता था क्योंकि उसे पता नहीं था कि भगवान की पूजा कैसे की जाती है । हर सुबह ब्राह्मण यह सोचकर शिवलिंग की सफाई करते थे कि यह किसी जानवर ने किया होगा ।एक दिन कटप्पा शिकार के बाद फिर से मंदिर गया और शिवलिंग पर कुछ धूल देखी जिसे उसने साफ करने का फैसला किया । लेकिन कटप्पा ने पाया कि उसके पास पानी लाने के लिए कोई बर्तन नहीं है । वह पास में बहती नदी के पास गया और जैसे तैसे एक बर्तन ढूढ़कर पानी भरकर लाया । फिर शिवलिंग के पास वापस चला गया और उसने सारा पानी शिवलिंग के ऊपर डाल दिया ।जब ब्राह्मण वापस मंदिर में आया तो वह शिवलिंग पर मांस और पानी देखकर घृणा से भर गया । उसे एहसास हुआ कि कोई भी जानवर ऐसा नहीं कर सकता है और केवल इंसान ही ऐसा कर सकता है । ब्राह्मण की आँखों में आंसू भर आए और उसने भगवान शिव से पूछा कि आप अपने लिए ऐसा अपमान कैसे सहन कर सकते हैं ।ईश्वर के प्रति सच्चा प्यार और भक्तिभगवान शिव ने अपने भक्त ब्राह्मण को उत्तर दिया कि जिसे तुम अपमान समझते हो, मेरे लिए दूसरे भक्त की ओर से भेंट है । मैं उनकी भक्ति से बंधा हूँ और जो कुछ भी वह प्रदान करता है उसे स्वीकार करता हूँ । भगवान शिव ने ब्राह्मण से कहा कि यदि आप उनकी भक्ति को देखना चाहते हैं तो पास में ही कहीं छिप जाएँ क्योंकि वे आने वाले हैं । ब्राह्मण झाड़ी के पास छिप गए ।कटप्पा हमेशा की तरह मांस लेकर पहुँचा तो यह देखकर हैरान रह गया कि शिव हमेशा की तरह उसकी भेंट स्वीकार नहीं कर रहे थे । कटप्पा ने सोचा कि उसने ऐसा क्या किया है कि शिव उसकी भेंट स्वीकार नहीं कर रहे हैं । उसने शिवलिंग को करीब से देखा और पाया कि शिवलिंग की दाहिनी आँख से कुछ रिस रहा था । कटप्पा ने शिवलिंग पर कुछ जड़ी बूटियां डाल दीं ताकि वो ठीक हो सकें लेकिन कटप्पा रक्त को रोकने में असफल रहे ।अंत में कटप्पा ने अपनी आँखें देने का फैसला किया । उसने चाकू निकाल कर अपनी दाहिनी आँख को निकालकर शिवलिंग पर रख दिया । खून रुक गया और कटप्पा ने राहत की सांस ली । लेकिन तभी उसने देखा कि अब बाई आँख से खून आने लगा है । उसने तुरंत अपनी दूसरी आँख निकालने के लिए चाकू निकाला । उसे लगा कि दोनों आँखों के बिना वह नहीं देख पाएगा कि उसे आँख कहाँ रखनी है ।अपनी भक्ति भावना में उसने शिव पर पैर भी रख दियाउसने अपना एक पैर शिवलिंग की आँख पर रखा और अपनी दूसरी आँख भी निकाल कर भगवान शिव को अर्पित कर दी । भगवान शिव के प्रति कटप्पा की अपार भक्ति देखकर ब्राह्मण हैरान रह गए थे । कटप्पा की भक्ति देखकर भगवान शिव प्रकट हुए और उसकी दृष्टि लौटा दी । कटप्पा ने भगवान शिव को प्रणाम किया और भगवान शिव को देख कर उनकी आँखों में खुशी के आंसू आ गए ।एक आदिवासी को संत की उपाधि प्रदान करते हुए भगवान ने दोहराया कि यह प्रभु के लिए सच्चा प्यार और भक्ति है ना कि हमारे द्वारा की जाने वाली प्रार्थना और अनुष्ठान, जो प्रभु को अपने पूरे हृदय से प्रेम करते हैं वही उसे प्राप्त करने की आशा कर सकते हैं ।तो दोस्तो आपको यह कहानी कैसी लगी आप कमेंट करके हमें अवश्य बताएं । दोस्तों क्या आप जानते हैं कि भारत देश में न जाने कितने लोग इस तरह के सच्चे श्रद्धालुओं का मजाक उड़ाते हैं । हमाराआपसे अनुरोध है इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें । दोस्तों हमें श्रद्धालुओं की भावनाओं को समझना चाहिए न कि उनका मजाक उड़ाना चाहिए । हम इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि इस दुनिया में अश्रद्धालुओं को भी सम्मान मिलना चाहिए लेकिन कुछ थोड़े बहुत श्रद्धालुओं को उनका अधिकार मिलना चाहिए ।इसी तरह की धार्मिक और मजेदार पोस्ट को पड़ते रहने के लिए हमारा व्हाट्सप्प ग्रुप ज्वाइन अवश्य करें । ग्रुप ज्वाइन कररने के लिए यहाँ क्लिक करें – Join Whatsapp । आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

  🌹🪴  गीता ज्ञान 🪴🌹 कटप्पा – महान भक्त, जिन्होंने अपनी दोनों आँखें भेंट दे दीं   By वनिता कासनियां पंजाब. कटप्पा दोस्तों आप लोगों ने बाहुबली फिल्म जरूर देखी होगी । उसमे बताया गया है कि किस तरह एक राज्य के वफादार कटप्पा ने बाहुबली के मर जाने के बाद भी शाशन का साथ निभाया । दोस्तों क्या आप जानते हैं कि आखिर यह कटप्पा नाम शास्त्रों में कहाँ से लिया गया है । चलिए आपको बताते हैं। गीता ज्ञान आज हम कटप्पा नाम के एक व्यक्ति के बारे में जानेंगे और जानेंगे कि उसने भगवान शिव को मांस का टुकड़ा और अपनी आँखें समर्पित क्यों कीं थी । कटप्पा का जन्म कालहस्ती के पास उदयपुर में एक शिकारी परिवार में हुआ था । वर्तमान के उदयपुर में जिसे उस समय  उत्तर कुरु  के नाम से जाना जाता था । आंध्र प्रदेश के राजमपेट में कटप्पा एक धनुर्धर एक दिन शिकार करने गया लेकिन जंगल में उन्हें एक मंदिर मिला जिसमें शिवलिंग था । कटप्पा भगवान शिव के भक्त थे और वह भगवान शिव को कुछ देना चाहते थे परंतु वह यह नहीं समझ पा रहे थे कि शिव को भेंट कैसे और किस प्रलकार से करें । फिर उन्होंने मांस का एक टुकड़ा...

🚩🌺🪴गीता ज्ञान🪴🌺🚩 महाराज युधिस्ठिर ने बताया जीवन का सबसे बड़ा क्या है By वनिता कासनियां पंजाब , यूँ तो हम सब जानते ही हैं कि आश्चर्य किसे कहते हैं लेकिन आप में से बहुत लोग शायद ना जानते हों की जीवन का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?, महाराज युधिस्ठिर के अनुसार जीवन का सबसे बड़ा आश्चर्य है अमर बनने की इच्छा । महाराज युधिस्ठिर के यक्ष को जवाब एक बार की बात है महाराज युधिस्ठिर अज्ञातवाश के समय वन में सभी पांडवों के साथ थे । जंगल में घूमते घूमते सभी पांडवों को प्यास लगने लगी । महाराज युधिस्ठिर ने एक एक करके सभी पांडवों को पानी लाने के लिए भेजा । सभी पानी लेने के लिए तो गए लेकिन वापिस लौटकर कोई भी नहीं आया । तब महाराज युधिष्ठिर ने स्वंय पांडवों को ढूढ़ने का प्रयास किया । जब महाराज युधिष्ठिर एक सरोवर के पास गए तो उन्होंने देखा कि सारे पांडव वहां बेहोस पड़े हुए हैं । महाराज युधिष्ठिर ने सोचा कि पांडवों की खबर बाद में लेते हैं पहले क्यों न सरोवर से कुछ पानी ही पी लिया जाये । जैसे ही महाराज युधिष्ठिर सरोवर से पानी पीने लगे तो वहां एक आवाज आयी जिसने उन्हें पानी पीने से रोक दिया । वह आवाज दरअसल यक्ष की थी जो उस सरोवर की रखवाली किया करते थे । यक्ष ने महाराज युधिष्ठिर को पानी पीने से रक दिया और उनके सामने एक शर्त रखी । यक्ष ने कहा कि अगर महाराज युधिष्ठिर उनके सवालों का जवाब दे देंगे तो वह सरोवर से पानी पी सकते हैं नहीं तो वो भी अपने भाइयों की तरह ही मृत्यु को प्राप्त हो जायेंगे । महाराज युधिष्ठिर ने यक्ष की शर्त मंजूर कर ली और यक्ष एक एक करके महाराज युधिष्ठिर से सवाल पूछने लगे । उन्होंने पहला सवाल पुछा कि वायु से भी तेज क्या है तो महाराज युधिष्ठिर ने जवाब दिया कि वायु से भी तेज मन है । वायु को तो एक जगह से दूसरी जगह तक पहुँचने में कुछ वक्त लगता है लेकिन मन तो कहीं भी बिना वक्त लगाए ही पहुचन सकता है । जैसे कि आप एक बार ताज महल देख कर आये हैं और दोबारा ताजमहल देखना चाहते हैं तो आपको वहां जाना पड़ेगा लेकिन मन में ताजमहल की तस्वीर तुरंत ही उभर कर आ जाएगी । इसी क्रम से सवाल पूछते हुए कहा की आकाश से भी ऊँचा कौन होता है तो महाराज युधिष्ठिर ने कहा कि पिता का साया आकाश से भी ऊँचा होता है । धरती से भी भारी कौन है पूछने पर महाराज युधिष्ठिर ने माता को धरती से भी भरी बताया । इसी क्रम से आगे बढ़ते हुए यक्ष ने पुछा कि सूर्य किस की आज्ञा से उदय होता है तो महाराज युधिष्ठिर ने कहा कि भगवान की आज्ञा से । विदेश जाने वाले का साथी कौन है पूछने पर बिद्या को विदेश जाने वाले का साथी बताया । इसी क्रम से जब यक्ष ने महाराज युधिष्ठिर से पुछा की जीवन का सबसे बड़ा अस्चर्य क्या है तो उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा आश्चर्य तो यही है कि रोज लोग एक दुसरे को मरते हुए देखते हैं लेकिन सोचते हैं कि वो कभी नहीं मरेंगे और हमशा जीने की इच्छा रखते हैं । लोग देखते हैं कि मेरे आस पड़ोस वाले सभी एक एक करके मर रहे हैं और फिर भी वह सोचते हैं कि उन्हें कभी नहीं मरना पड़ेगा यही जीवन का सबसे बड़ा आश्चर्य है । महाराज युधिस्ठिर ने अपनी सूझबूझ से किया अपने भाईयों को जीवित जब महाराज युधिस्ठिर ने यक्ष के सारे सवालों का सही सही जवाब दे दिया तो वे बड़े प्रसन्न हुए और उन्होंने महाराज युधिस्ठिर से वरदान मांगने को कहा । महाराज युधिस्ठिर ने अपने भाइयों को जीवित कर देने का वरदान यक्ष से माँगा । यक्ष ने कहा कि वह केवल दो भाईओं को ही जीवित कर सकते हैं । आपको यह जानकर हैरानी होsगी कि महाराज युधिस्ठिर ने ये जानते हुए भी कि भीम और अर्जुन युद्ध जीतने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं उन दोनों को जीवित नहीं किया । महाराज युधिस्ठिर जानते थे कि आने वाले समय में महाभारत का युद्ध होने वाला है और अगर वो भीम और अर्जुन को जीवित नहीं करेंगे तो वे युद्ध नहीं जीत सकते । दरअसल भीम, अर्जुन और महाराज युधिस्ठिर माता कुंती के पुत्र थे और नकुल और सहदेव माता माधवी के पुत्र थे । इसलिए महाराज युधिस्ठिर ने सोचा कि अगर एक पुत्र माता कुंती के जीवित बचते हैं और एक पुत्र माधवी के तो यह न्याय पूर्ण होगा और अगर भीम और अर्जुन जीवित बच गए लेकिन माता माधवी के दोनों पुत्र मारे गए तो यह अन्याय होगा । महाराज युधिस्ठिर ने न्याय और धर्म की रक्षा के लिए आने वाली युद्ध में होने वाली जीत को भी डाव पर लगा दिया महाराज युधिस्ठिर को धर्मराज कहा जाता है और उन्होंने यहाँ यह साबित कर दिया कि वे धर्म को सबसे बड़ा मानते हैं । यक्ष महाराज युधिस्ठिर का न्याय देखकर बहुत ही ज्यादा प्रभावित हुए और उन्होंने पांचो पांडवों को फिर से जीवित कर दिया । लोग अमर क्यों होना चाहते हैं? महाराज युधिष्ठिर के अनुसार अमर होने की इच्छा ही इस दुनिया में सबसे बड़ा आश्चर्य है । फिर भी न जाने लोग अमर क्यों होना चाहते हैं? इसका कारण शास्त्रों में बताय गया है कि सारे जीव भगवान के अंश स्वरूप ही हैं । क्योंकि भगवान अमर हैं इसलिए हम भी अमर होना चाहते हैं । अमर होना इस जगत में संभव नहीं है क्योंकि इस भौतिक जगत को नश्वर बताया गया है । इस जगत में जिसने भी जन्म लिया है उसकी मृत्यु होना निश्चित है । अमर होने की इच्छा रखने का एक कारण यह भी है कि लोग मरने से डरते हैं इसलिए वे अमर होना चाहते हैं । प्राचीन काल में कई राक्षस रहे हैं जो अमर होने के लिए शिव जी की तपस्या किया करते थे लेकिन आज तक कोई भी अमर नहीं हो पाया । पृथ्वी लोक की तो बात ही जाने दें क्योंकि स्वर्ग लोक में भी कोई अमर नहीं है । तो मित्रो केसा लगा आपको आज का यह पोस्ट । इसी तरह की अध्यात्मिक कहानियाँ पड़ते रहने के लिए हमारा व्हाटसप्प् ग्रुप जॉइन करें । जॉइन करने के लिए यहाँ क्लिक

🚩🌺🪴गीता ज्ञान🪴🌺🚩 महाराज युधिस्ठिर ने बताया जीवन का सबसे बड़ा क्या है   By  वनिता कासनियां पंजाब  , यूँ तो हम सब जानते ही हैं कि आश्चर्य किसे कहते हैं लेकिन आप में से बहुत लोग शायद ना जानते हों की जीवन का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?, महाराज युधिस्ठिर के अनुसार जीवन का सबसे बड़ा आश्चर्य है अमर बनने की इच्छा । महाराज युधिस्ठिर के यक्ष को जवाब एक बार की बात है महाराज युधिस्ठिर अज्ञातवाश के समय वन में सभी पांडवों के साथ थे । जंगल में घूमते घूमते सभी पांडवों को प्यास लगने लगी । महाराज युधिस्ठिर ने एक एक करके सभी पांडवों को पानी लाने के लिए भेजा । सभी पानी लेने के लिए तो गए लेकिन वापिस लौटकर कोई भी नहीं आया । तब महाराज युधिष्ठिर ने स्वंय पांडवों को ढूढ़ने का प्रयास किया । जब महाराज युधिष्ठिर एक सरोवर के पास गए तो उन्होंने देखा कि सारे पांडव वहां बेहोस पड़े हुए हैं । महाराज युधिष्ठिर ने सोचा कि पांडवों की खबर बाद में लेते हैं पहले क्यों न सरोवर से कुछ पानी ही पी लिया जाये । जैसे ही महाराज युधिष्ठिर सरोवर से पानी पीने लगे तो वहां एक आवाज आयी जिसने उन्हें पानी पीने से रोक दिया । वह...