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बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रमभगवान श्री राम ने किस तरह तोड़ा सुग्रीव का घमंड वनिता कासनियां पंजाब द्वाराजब भगवान श्री राम वनवास में थे तो दुष्ट एवं अधर्मी रावण माता सीता का हरण कर लिया, रामायण में बताया गया है कि जब भगवान सुग्रीव से मदद मांगने गए तो सुग्रीव ने भगवान श्री राम की अवहेलना कर दी क्योंकि सुग्रीव उन्हें साधारण इंसान समझने की भूल कर बैठे ।भगवान श्री राम का वनवास समस्त असुरों के संहार के लिए ही था और ऐसा ही हुआ । लेकिन भगवान श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में अवतरित हुए थे इसलिए उन्होंने अपने आचरण से बताया कि एक आदर्श पुत्र, राजा, पति, भाई अथवा एक आदर्श मनुष्य को केसा होना चाहिए ।भगवान चाहते तो एक क्षण में ही रावण को मार सकते थे लेकिन उन्होंने आदर्श व्यवहार का प्रदर्शन करते हुए सुग्रीव से मदद लेने का विचार किया ।सुग्रीव द्वारा भगवान राम की परीक्षासुग्रीव ने पहली गलती तो यह कर दी कि जब भगवान श्री राम उनके राज्य में आए तो उन्होंने श्री राम की परीक्षा के लिए हनुमान जी को भेजा ।दूसरी गलती सुग्रीव ने यह कर दी कि जब भगवान श्री राम और लक्ष्मण उनके पास आए तो उन्होंने श्री राम को बैठने के लिए स्थान दिया लेकिन लक्ष्मण जी को बैठने के लिए स्थान नहीं दिया । हनुमान जी ने सुग्रीव के घमंड को देखते हुए लक्ष्मण जी के लिए बैठने का स्थान दिया और खुद उनके उनके चरणों के पास बैठ गए ।तीसरी गलती जो सुग्रीव ने की वह है भगवान के शस्त्र कौशल की परीक्षा । सुग्रीव ने कहा कि वह भगवान श्री राम की मदद तभी करेंगे जब वह यह सिद्ध करें कि वे रावण को मारने में समर्थ हैं ।इसी का परीक्षण कराने के लिए सुग्रीव ने भगवान श्री राम को जंगल में भेजा जहां उनसे सात पेड़ गिराने के लिए सुग्रीव ने कह । भगवान श्री राम ने एक ही बाण से सातों पेड़ों को गिरा दिया । फिर उनसे हड्डियों के बने पहाड़ों को तोड़ने के लिए कहा गया और भगवान ने एक ही बाण में पहाड़ के परखिच्छे उड़ा दिए ।सुग्रीव को अभी भी यह समझ नहीं आया कि उसने घमंडवश भगवान को साधारण समझने की भूल कर दी है और परीक्षा लेकर उनको परेशान करने का पाप अपने सिर ले लिया है ।सुग्रीव ने भगवान श्री राम के सामने रखी आखिरी शर्तअंत में सुग्रीव ने कहा कि अगर भगवान श्री राम बालि का वध करके उसका राज्य सुग्रीव को दिला दें तो वे श्री राम की मदद करेंगे ।दरसल बालि सुग्रीव का भाई था और बहुत ही अधिक ताकतवर था । एक बार उसने रावण को अपने हाथों में दबाकर सातों द्वीपों की सैर कराई थी । तब से रावण बालि से बहुत अधिक डरता था और इसके पास नहीं आता था । एक बार की बात है बालि के राज्य पर एक राक्षस ने हमला कर दिया और बालि और उनके भाई सुग्रीव उसका वध करने के किए बाहर निकले ।राक्षस एक गुफा के अंदर चला गया और बालि भी उसे मारने के लिए अंदर चला गया । बालि ने गुफा के द्वार पर सुग्रीव को तैनात किया ताकि वो राक्षस गुफा के द्वार से बाहर ना भाग पाए । सुग्रीव ने देखा कि गुफा के अंदर से खून की नदी बह रही है और अंदर से किसी के चिल्लाने की आवाज आ रही है ।सुग्रीव ने सोचा कि राक्षस ने उसके भाई बालि को मार डाला है और वह अब सुग्रीव के राज्य को हड़प लेगा । यह सोचकर सुग्रीव ने गुफा का द्वार एक बहुत बड़े पत्थर से बंद कर दिया । सुग्रीव ने जब वापिस जाकर राज्य में यह खबर दी कि बालि की मृत्यु हो गई है तो सुग्रीव को किसकिंधा का नया राजा बना दिया गया ।असल में बालि जिंदा बच गाया और उसने राक्षस को मार डाला । राक्षस को मारकर जब बालि वापिस आया तो उसने गुफा का द्वार बंद पाया । बालि लगा कि सुग्रीव ने राज्य के लालच में उसे धोका दिया है । बलि ने अपने राज्य में जाकर सुग्रीव को बहुत बुरी तरह मारा । सुग्रीव ने समझाने की कोशिश की लेकिन बलि नहीं माना ।सुग्रीव जैसे तैसे अपनी जान बचाकर भागे और अपना राज्य खो बैठे । सुग्रीव ने कहा कि बिना राज्य के वो भगवान श्री राम की मदद नहीं कर सकते इसलिए अगर भगवान सुग्रीव को उनका राज्य वापिस दिला दें तो वे उनकी मदद जरूर करेंगे । भागवान श्री राम सुग्रीव की शर्त को मान गए ।सुग्रीव का घमंड हुआ चूरभगवान श्री राम ने योजना बनाई कि सुग्रीव जाकर बलि को युद्ध के लिए बुलाएंगे और भगवान श्री राम बाण मारकर उसे मार देंगे । बालि को यह वरदान प्राप्त था कि सामने वाले की आधी शक्ति उसके पास आ जाती थी और इसलिए बालि को कोई हारा नहीं पाता था ।सुग्रीव ने बालि को युद्ध के लिए ललकारा । बालि गुस्से में आग बबूला हो गया और सुग्रीव को मारने के लिए बाहर आया । भगवान श्री राम ने सुग्रीव को एक माला दी थी जिससे सुग्रीव की पहचान हो सके । दरअसल बालि और सुग्रीव एक जैसे ही दिखते थे, बालि ने एक ही वार में सुग्रीव के गले की माला तोड़ दी ।असल में भगवान को सुग्रीव को पहचानने के लिए माला की कोई जरूरत नहीं थी फिर भी भगवान ने बालि को नहीं मारा और सुग्रीव को पिटने दिया । बालि ने सुग्रीव को बहुत मारा और सुग्रीव की जान बहुत ही मुश्किल से बची ।सुग्रीव को लगा कि माला के टूट जाने की वजह से यह सब हुआ है लेकिन भगवान के प्रति पिछली तीन चार गलतियां करने की वजह से ही सुग्रीव को इतनी मार पड़ी ।दूसरी बार सुग्रीव ने अच्छे से माला पहनी और बालि को युद्ध के लिए ललकारा । इस बार भी बालि ने सुग्रीव के गले में पड़ी माला को पहले हीर वार में तोड़ दिया । इस बार सुग्रीव ने सोच लिया कि अब उनके प्राण नहीं बचेंगे । लेकिन इस बार भगवान श्री राम ने बालि को तीर मार दिया और उसकी वहीं पर ही मृत्यु हो गई ।इसी तरह की अध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पोस्ट की जानकारी पाने की लिए हमारे ब्लॉग ग्रुप से जुडें । ग्रुप से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें – Join बाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम Groupबाल वनिता महिला वृद्ध आश्रम

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भगवान श्री राम ने किस तरह तोड़ा सुग्रीव का घमंड

जब भगवान श्री राम वनवास में थे तो दुष्ट एवं अधर्मी रावण माता सीता का हरण कर लिया, रामायण में बताया गया है कि जब भगवान सुग्रीव से मदद मांगने गए तो सुग्रीव ने भगवान श्री राम की अवहेलना कर दी क्योंकि सुग्रीव उन्हें साधारण इंसान समझने की भूल कर बैठे ।

भगवान श्री राम का वनवास समस्त असुरों के संहार के लिए ही था और ऐसा ही हुआ । लेकिन भगवान श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में अवतरित हुए थे इसलिए उन्होंने अपने आचरण से बताया कि एक आदर्श पुत्र, राजा, पति, भाई अथवा एक आदर्श मनुष्य को केसा होना चाहिए ।

भगवान चाहते तो एक क्षण में ही रावण को मार सकते थे लेकिन उन्होंने आदर्श व्यवहार का प्रदर्शन करते हुए सुग्रीव से मदद लेने का विचार किया ।


सुग्रीव द्वारा भगवान राम की परीक्षा

सुग्रीव ने पहली गलती तो यह कर दी कि जब भगवान श्री राम उनके राज्य में आए तो उन्होंने श्री राम की परीक्षा के लिए हनुमान जी को भेजा ।

दूसरी गलती सुग्रीव ने यह कर दी कि जब भगवान श्री राम और लक्ष्मण उनके पास आए तो उन्होंने श्री राम को बैठने के लिए स्थान दिया लेकिन लक्ष्मण जी को बैठने के लिए स्थान नहीं दिया । हनुमान जी ने सुग्रीव के घमंड को देखते हुए लक्ष्मण जी के लिए बैठने का स्थान दिया और खुद उनके उनके चरणों के पास बैठ गए ।

तीसरी गलती जो सुग्रीव ने की वह है भगवान के शस्त्र कौशल की परीक्षा । सुग्रीव ने कहा कि वह भगवान श्री राम की मदद तभी करेंगे जब वह यह सिद्ध करें कि वे रावण को मारने में समर्थ हैं ।

इसी का परीक्षण कराने के लिए सुग्रीव ने भगवान श्री राम को जंगल में भेजा जहां उनसे सात पेड़ गिराने के लिए सुग्रीव ने कह । भगवान श्री राम ने एक ही बाण से सातों पेड़ों को गिरा दिया । फिर उनसे हड्डियों के बने पहाड़ों को तोड़ने के लिए कहा गया और भगवान ने एक ही बाण में पहाड़ के परखिच्छे उड़ा दिए ।

सुग्रीव को अभी भी यह समझ नहीं आया कि उसने घमंडवश भगवान को साधारण समझने की भूल कर दी है और परीक्षा लेकर उनको परेशान करने का पाप अपने सिर ले लिया है ।

सुग्रीव ने भगवान श्री राम के सामने रखी आखिरी शर्त

अंत में सुग्रीव ने कहा कि अगर भगवान श्री राम बालि का वध करके उसका राज्य सुग्रीव को दिला दें तो वे श्री राम की मदद करेंगे ।

दरसल बालि सुग्रीव का भाई था और बहुत ही अधिक ताकतवर था । एक बार उसने रावण को अपने हाथों में दबाकर सातों द्वीपों की सैर कराई थी । तब से रावण बालि से बहुत अधिक डरता था और इसके पास नहीं आता था । एक बार की बात है बालि के राज्य पर एक राक्षस ने हमला कर दिया और बालि और उनके भाई सुग्रीव उसका वध करने के किए बाहर निकले ।

राक्षस एक गुफा के अंदर चला गया और बालि भी उसे मारने के लिए अंदर चला गया । बालि ने गुफा के द्वार पर सुग्रीव को तैनात किया ताकि वो राक्षस गुफा के द्वार से बाहर ना भाग पाए । सुग्रीव ने देखा कि गुफा के अंदर से खून की नदी बह रही है और अंदर से किसी के चिल्लाने की आवाज आ रही है ।

सुग्रीव ने सोचा कि राक्षस ने उसके भाई बालि को मार डाला है और वह अब सुग्रीव के राज्य को हड़प लेगा । यह सोचकर सुग्रीव ने गुफा का द्वार एक बहुत बड़े पत्थर से बंद कर दिया । सुग्रीव ने जब वापिस जाकर राज्य में यह खबर दी कि बालि की मृत्यु हो गई है तो सुग्रीव को किसकिंधा का नया राजा बना दिया गया ।

असल में बालि जिंदा बच गाया और उसने राक्षस को मार डाला । राक्षस को मारकर जब बालि वापिस आया तो उसने गुफा का द्वार बंद पाया । बालि लगा कि सुग्रीव ने राज्य के लालच में उसे धोका दिया है । बलि ने अपने राज्य में जाकर सुग्रीव को बहुत बुरी तरह मारा । सुग्रीव ने समझाने की कोशिश की लेकिन बलि नहीं माना ।

सुग्रीव जैसे तैसे अपनी जान बचाकर भागे और अपना राज्य खो बैठे । सुग्रीव ने कहा कि बिना राज्य के वो भगवान श्री राम की मदद नहीं कर सकते इसलिए अगर भगवान सुग्रीव को उनका राज्य वापिस दिला दें तो वे उनकी मदद जरूर करेंगे । भागवान श्री राम सुग्रीव की शर्त को मान गए ।

सुग्रीव का घमंड हुआ चूर

भगवान श्री राम ने योजना बनाई कि सुग्रीव जाकर बलि को युद्ध के लिए बुलाएंगे और भगवान श्री राम बाण मारकर उसे मार देंगे । बालि को यह वरदान प्राप्त था कि सामने वाले की आधी शक्ति उसके पास आ जाती थी और इसलिए बालि को कोई हारा नहीं पाता था ।

सुग्रीव ने बालि को युद्ध के लिए ललकारा । बालि गुस्से में आग बबूला हो गया और सुग्रीव को मारने के लिए बाहर आया । भगवान श्री राम ने सुग्रीव को एक माला दी थी जिससे सुग्रीव की पहचान हो सके । दरअसल बालि और सुग्रीव एक जैसे ही दिखते थे, बालि ने एक ही वार में सुग्रीव के गले की माला तोड़ दी ।


असल में भगवान को सुग्रीव को पहचानने के लिए माला की कोई जरूरत नहीं थी फिर भी भगवान ने बालि को नहीं मारा और सुग्रीव को पिटने दिया । बालि ने सुग्रीव को बहुत मारा और सुग्रीव की जान बहुत ही मुश्किल से बची ।

सुग्रीव को लगा कि माला के टूट जाने की वजह से यह सब हुआ है लेकिन भगवान के प्रति पिछली तीन चार गलतियां करने की वजह से ही सुग्रीव को इतनी मार पड़ी ।

दूसरी बार सुग्रीव ने अच्छे से माला पहनी और बालि को युद्ध के लिए ललकारा । इस बार भी बालि ने सुग्रीव के गले में पड़ी माला को पहले हीर वार में तोड़ दिया । इस बार सुग्रीव ने सोच लिया कि अब उनके प्राण नहीं बचेंगे । लेकिन इस बार भगवान श्री राम ने बालि को तीर मार दिया और उसकी वहीं पर ही मृत्यु हो गई ।


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