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पांडव दुर्योधन से छिपकर कहां गए November 11, 2022 गीता ज्ञानअभी तक हमने देखा कि किस तरह पांडवों को मारने का षड्यंत्र दुर्योधन ने रचा लेकिन पांडव किसी तरह सुरंग से बचकर निकल गए । आपने पड़ा होगा कि एक भीलनी और उसके पांच बच्चे भी इस रात उस घर में जलकर मारे गए थे । अगर आपने पिछली पोस्ट नहीं पड़ी है तो आगे क्लिक करके पड़ सके हैं – पांडवों को जलने का षड्यंत्र ।इसी तरह की धार्मिक पोस्ट पड़ते रहने के लिए हमारा व्हाट्सएप ज्वाइन करें । ग्रुप ज्वाइन करने के लिए यहां क्लिक करें – WhatsappGroupसबको भीलनी और उसके बच्चों के कंकाल देखकर यही लग रहा था कि वो माता कुंती और पांडवों के कंकाल हैं । सब जगह शोक की लहर थी, जनता जानती थी कि यह दुर्योधन ने ही करवाया है । दूसरी ओर पांडव सुरंग से निकलकर एक गंगा नदी के किनारे पहुंच गए । वहां विदुर द्वारा भेजे गए एक गुप्तचर ने उन्हें नदी पार करवाकर जंगल में भेज दिया । गुप्तचर ने बताया कि विदुर जी का आदेश है कि पांडव कुछ समय भेष बदलकर ही छुपे रहें ।भीम का पहला विवाहजंगल में चलते चलते भीम के अलावा सारे भाई थक गए और आराम करने लगे । तभी वहां एक राक्षसी हिडिंबा आई जो पांडवों को मारना चाहती थी लेकिन भीम को देखकर मोहित हो गई और भीम के सामने विवाह का प्रस्ताव रखने लगी । इतने में ही हिडिंबा का भाई हिडिम्बासुर भी वहां आ गया और भीम पर उसने हमला कर दिया । भीम और हिडिम्बासुर का युद्ध बहुत लंबा चला और भीम ने उसे मार डाला ।भीम ने वापिस आकर हिडिंबा को वापिस लौट जाने को कहा लेकिन हिडम्बा ने माता कुंती से कहा कि अगर भीम उससे विवाह नहीं करते तो वह अपने प्राण त्याग देगी । तब माता कुंती ने भीम को हिडिंबा से विवाह करने का आदेश दिया । भीम ने एक शर्त पर विवाह किया कि जैसे ही हिडिंबा से उनका एक पुत्र हो जाएगा वे हिडिंबा को छोड़ देंगे । भीम और हिडिंबा का पुत्र घटोत्कच उत्पन्न हुआ जो भीम के समान बलशाली और हिडिंबा जैसा मायावी था । वह पांडवों के प्रति सम्मान की भावना रखता था और वे भी उससे बड़ा स्नेह किया करते थे ।पुत्र होने के बाद हिडिंबा भीम से दूर चली गई थी और अपने पुत्र को पांडवों के पास छोड़ गई थी । घटोत्कच का मन राक्षसों में ही लगता था इसलिए वह भी माता कुंती से आज्ञा लेकर वापिस चला गया था । उसने कहा था कि जब कभी भी पांडवों को उसकी सहायता की जरूरत होगी तब वह मात्र एक बार बुलाने पर हाजिर हो जायेगा ।पांडव कहां छिपेपांडवो को जंगल में वेदव्यास जी मिले जिन्हें उन्हें एक ब्राह्मण के घर पर भेष बदलकर रहने को कहा । पांडव ब्राम्हण के भेष में उस ब्राह्मण के घर रहने लगे थे । एक दिन उस ब्राह्मण के घर के सभी सदस्य रो रहे थे । माता कुंती ने पांडवों से कहा कि इस ब्राम्हण ने हमे छुपने की जगह दी है इसलिए इसका हमारे ऊपर एहसान है । हमे इसकी मदद करके इसका एहसान चुकाना चाहिए ।जब कुंती ने ब्राम्हण परिवार से रोने की वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि उनके गांव के बाहर एक राक्षस बकासुर रहता है ।गांव वाले बकासुर के लिए रोज एक गाड़ी अन्न और 2 भैंसे भेजते हैं लेकिन जो व्यक्ति गाड़ी और भैंसे लेकर जाता है बकासुर उसे भी खा जाता है । इस बार गाड़ी और भैंसे पहुंचाने की बारी उस ब्राह्मण के परिवार की है इसलिए सभी रो रहे हैं । माता कुंती ने कहा कि मैं अपने पुत्र भीम को इस काम के लिए भेज देती हूं । वह बड़ा ही बलवान और होशियार है जो राक्षस को भोजन भी पहुंचा देगा और जिंदा भी वापिस आ जायेगा ।भीम गाड़ी लेकर आगे आगे जा रहे थे और गाड़ी का भोजन स्वयं ही करते जा रहे थे । जब बकासुर ने भीम को आते देखा तो वह खुश हुआ लेकिन पास आने पर उसने देखा कि भीम उसका भोजन खाए जा रहे हैं तो उसने भीम पर हमला कर दिया । 10,000 हाथियों के बल से युक्त भीम ने बकासुर को मार डाला और गांव के चौराहे पर पटक दिया । गांव वालों ने जब बकासुर को मरा पाया तो वे बड़े ही प्रसन्न हुए और ब्राह्मण के घर पहुंचे । पांडव छुप कर रह रहे थे इसलिए उन्होंने ब्राह्मण को सच छिपाने के लिए कहा था और ब्राह्मण ने गांव वालों को एक झूठी कहानी बनाकर संतुष्ट कर दिया ।पांडवो को द्रोपदी के बारे में पता केसे चलाएक दिन उस ब्राह्मण के घर पर एक और ब्राह्मण आए हुए थे जो उनको काफी सारे राज्यों के बारे में विस्तार से बता रहे थे । जब ब्राह्मण ने द्रुपद का जिक्र किया तो पांडवों ने द्रुपद के बारे में विस्तार से सुनना चाहा क्योंकि उन्होंने ही उसका आधा राज्य जीता था और उसे बंधी बनाकर द्रोणाचार्य को दे दिया था ।ब्राह्मण ने बताया कि राजा द्रुपद द्रोणाचार्य के द्वारा अपने अपमान के कारण परेशान रहते हैं । अब वह पहले से कमजोर हो गए हैं और यहां वहां भटकते रहते हैं । वो आश्रम आश्रम जाते हैं ताकि कोई ब्राह्मण यज्ञ करके उन्हें ऐसा पुत्र दिलाए जो द्रोण को मार सके लेकिन उन्हें कोई ऐसा ब्राह्मण नहीं मिलता । एक बार द्रुपद को एक ब्राह्मण उपयज मिले जिनकी उन्होंने बड़े ही अच्छे से सेवा की लेकिन उपयज ने द्रुपद का काम करने से मना कर दिया ।जब मना करने के बाद भी द्रुपद ने एक साल और उपयज की सेवा की तब उन्होंने उसे अपने बड़े भाई यज के बारे में बताया । उन्होंने कहा कि यज यह काम कर देंगे । ऐसा ही हुआ, यज ने द्रुपद का काम कर दिया और यज्ञ करके उसे ऐसा पुत्र दिलाया जो द्रोण का वध कर सके । यज्ञ से एक कन्या भी प्राप्त हुई और इसी के साथ भविस्यवाणी हुई कि वह कन्या देवताओं का प्रयोजन सिद्ध करने के लिए उत्पन्न हुई है । पुत्र का नाम धृष्टद्युम्न रखा गया और पुत्री का नाम द्रोपदी ।https://vnita38.blogspot.com/2022/10/by-physical-level-psychological-level.htmlपांडव द्रोपदी के बारे में सुनकर बैचेन हो रहे थे । ब्राह्मण ने द्रोपदी के स्वयंवर के बारे में सुना तो वे वहां जाने के लिए तत्पर हो गए लेकिन उन्हें व्यास देव जी बात याद आई कि वे उसी ब्राह्मण के घर में ही रहेंगे जब तक व्यास देव अगला आदेश उन्हें न दें । पांडवों व्याकुल हो रहे थे इसलिए उन्होंने व्यास देव का ध्यान किया और वे प्रकट गए । व्यास देव सबके मन की बात जानने वाले थे, उन्होंने पांडवों से बिना कुछ पूछे ही कहा कि उन्हें पांचाल जाना चाहिए ।पूछने पर व्यास देव ने द्रोपदी के पिछले जीवन का प्रसंग बताया । पिछले जन्म में द्रोपदी एक ब्राह्मण की कन्या थी जिसका विवाह नहीं हो रहा था । उसने शिव जी की तपस्या की और शिव जी प्रकट हो गए । शिव जी ने वरदान मांगने को कहा तो द्रोपदी ने पांच बार बोल दिया कि उन्हें एक बलशाली पति प्राप्त हो, एक धार्मिक पति प्राप्त हो, एक सहनशील पति प्राप्त हो इत्यादि ।तब शिव जी ने कहा था कि तुम्हे अगले जन्म में पांच पति प्राप्त होंगे क्योंकि तुमने पांच बार पति मांगा है । व्यास देव ने बताया कि शिव जी के वरदान अनुसार पांच पांडव ही द्रोपदी के पति के रूप नियुक्त हैं इसलिए उन्हें द्रोपदी के स्वयंवर में जाना चाहिए ।आगे की कहानी बताएंगे अगले पोस्ट में । अगली पोस्ट की जानकारी पाने केलिए व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करें । ग्रुप ज्वाइन करने के लिए यहां क्लिक करें –https://chat.whatsapp.com/4ZNNZKzaDF2IrLZM2YvD2s

पांडव दुर्योधन से छिपकर कहां गए

अभी तक हमने देखा कि किस तरह पांडवों को मारने का षड्यंत्र दुर्योधन ने रचा लेकिन पांडव किसी तरह सुरंग से बचकर निकल गए । आपने पड़ा होगा कि एक भीलनी और उसके पांच बच्चे भी इस रात उस घर में जलकर मारे गए थे । अगर आपने पिछली पोस्ट नहीं पड़ी है तो आगे क्लिक करके पड़ सके हैं – पांडवों को जलने का षड्यंत्र 

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सबको भीलनी और उसके बच्चों के कंकाल देखकर यही लग रहा था कि वो माता कुंती और पांडवों के कंकाल हैं । सब जगह शोक की लहर थी, जनता जानती थी कि यह दुर्योधन ने ही करवाया है । दूसरी ओर पांडव सुरंग से निकलकर एक गंगा नदी के किनारे पहुंच गए । वहां विदुर द्वारा भेजे गए एक गुप्तचर ने उन्हें नदी पार करवाकर जंगल में भेज दिया । गुप्तचर ने बताया कि विदुर जी का आदेश है कि पांडव कुछ समय भेष बदलकर ही छुपे रहें ।

भीम का पहला विवाह

जंगल में चलते चलते भीम के अलावा सारे भाई थक गए और आराम करने लगे । तभी वहां एक राक्षसी हिडिंबा आई जो पांडवों को मारना चाहती थी लेकिन भीम को देखकर मोहित हो गई और भीम के सामने विवाह का प्रस्ताव रखने लगी । इतने में ही हिडिंबा का भाई हिडिम्बासुर भी वहां आ गया और भीम पर उसने हमला कर दिया । भीम और हिडिम्बासुर का युद्ध बहुत लंबा चला और भीम ने उसे मार डाला ।

भीम ने वापिस आकर हिडिंबा को वापिस लौट जाने को कहा लेकिन हिडम्बा ने माता कुंती से कहा कि अगर भीम उससे विवाह नहीं करते तो वह अपने प्राण त्याग देगी । तब माता कुंती ने भीम को हिडिंबा से विवाह करने का आदेश दिया । भीम ने एक शर्त पर विवाह किया कि जैसे ही हिडिंबा से उनका एक पुत्र हो जाएगा वे हिडिंबा को छोड़ देंगे । भीम और हिडिंबा का पुत्र घटोत्कच उत्पन्न हुआ जो भीम के समान बलशाली और हिडिंबा जैसा मायावी था । वह पांडवों के प्रति सम्मान की भावना रखता था और वे भी उससे बड़ा स्नेह किया करते थे ।

पुत्र होने के बाद हिडिंबा भीम से दूर चली गई थी और अपने पुत्र को पांडवों के पास छोड़ गई थी । घटोत्कच का मन राक्षसों में ही लगता था इसलिए वह भी माता कुंती से आज्ञा लेकर वापिस चला गया था । उसने कहा था कि जब कभी भी पांडवों को उसकी सहायता की जरूरत होगी तब वह मात्र एक बार बुलाने पर हाजिर हो जायेगा ।

पांडव कहां छिपे

पांडवो को जंगल में वेदव्यास जी मिले जिन्हें उन्हें एक ब्राह्मण के घर पर भेष बदलकर रहने को कहा । पांडव ब्राम्हण के भेष में उस ब्राह्मण के घर रहने लगे थे । एक दिन उस ब्राह्मण के घर के सभी सदस्य रो रहे थे । माता कुंती ने पांडवों से कहा कि इस ब्राम्हण ने हमे छुपने की जगह दी है इसलिए इसका हमारे ऊपर एहसान है । हमे इसकी मदद करके इसका एहसान चुकाना चाहिए ।

जब कुंती ने ब्राम्हण परिवार से रोने की वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि उनके गांव के बाहर एक राक्षस बकासुर रहता है ।

गांव वाले बकासुर के लिए रोज एक गाड़ी अन्न और 2 भैंसे भेजते हैं लेकिन जो व्यक्ति गाड़ी और भैंसे लेकर जाता है बकासुर उसे भी खा जाता है । इस बार गाड़ी और भैंसे पहुंचाने की बारी उस ब्राह्मण के परिवार की है इसलिए सभी रो रहे हैं । माता कुंती ने कहा कि मैं अपने पुत्र भीम को इस काम के लिए भेज देती हूं । वह बड़ा ही बलवान और होशियार है जो राक्षस को भोजन भी पहुंचा देगा और जिंदा भी वापिस आ जायेगा ।

भीम गाड़ी लेकर आगे आगे जा रहे थे और गाड़ी का भोजन स्वयं ही करते जा रहे थे । जब बकासुर ने भीम को आते देखा तो वह खुश हुआ लेकिन पास आने पर उसने देखा कि भीम उसका भोजन खाए जा रहे हैं तो उसने भीम पर हमला कर दिया । 10,000 हाथियों के बल से युक्त भीम ने बकासुर को मार डाला और गांव के चौराहे पर पटक दिया । गांव वालों ने जब बकासुर को मरा पाया तो वे बड़े ही प्रसन्न हुए और ब्राह्मण के घर पहुंचे । पांडव छुप कर रह रहे थे इसलिए उन्होंने ब्राह्मण को सच छिपाने के लिए कहा था और ब्राह्मण ने गांव वालों को एक झूठी कहानी बनाकर संतुष्ट कर दिया ।

पांडवो को द्रोपदी के बारे में पता केसे चला

एक दिन उस ब्राह्मण के घर पर एक और ब्राह्मण आए हुए थे जो उनको काफी सारे राज्यों के बारे में विस्तार से बता रहे थे । जब ब्राह्मण ने द्रुपद का जिक्र किया तो पांडवों ने द्रुपद के बारे में विस्तार से सुनना चाहा क्योंकि उन्होंने ही उसका आधा राज्य जीता था और उसे बंधी बनाकर द्रोणाचार्य को दे दिया था ।

ब्राह्मण ने बताया कि राजा द्रुपद द्रोणाचार्य के द्वारा अपने अपमान के कारण परेशान रहते हैं । अब वह पहले से कमजोर हो गए हैं और यहां वहां भटकते रहते हैं । वो आश्रम आश्रम जाते हैं ताकि कोई ब्राह्मण यज्ञ करके उन्हें ऐसा पुत्र दिलाए जो द्रोण को मार सके लेकिन उन्हें कोई ऐसा ब्राह्मण नहीं मिलता । एक बार द्रुपद को एक ब्राह्मण उपयज मिले जिनकी उन्होंने बड़े ही अच्छे से सेवा की लेकिन उपयज ने द्रुपद का काम करने से मना कर दिया ।

जब मना करने के बाद भी द्रुपद ने एक साल और उपयज की सेवा की तब उन्होंने उसे अपने बड़े भाई यज के बारे में बताया । उन्होंने कहा कि यज यह काम कर देंगे । ऐसा ही हुआ, यज ने द्रुपद का काम कर दिया और यज्ञ करके उसे ऐसा पुत्र दिलाया जो द्रोण का वध कर सके । यज्ञ से एक कन्या भी प्राप्त हुई और इसी के साथ भविस्यवाणी हुई कि वह कन्या देवताओं का प्रयोजन सिद्ध करने के लिए उत्पन्न हुई है । पुत्र का नाम धृष्टद्युम्न रखा गया और पुत्री का नाम द्रोपदी ।

https://vnita38.blogspot.com/2022/10/by-physical-level-psychological-level.html

पांडव द्रोपदी के बारे में सुनकर बैचेन हो रहे थे । ब्राह्मण ने द्रोपदी के स्वयंवर के बारे में सुना तो वे वहां जाने के लिए तत्पर हो गए लेकिन उन्हें व्यास देव जी बात याद आई कि वे उसी ब्राह्मण के घर में ही रहेंगे जब तक व्यास देव अगला आदेश उन्हें न दें । पांडवों व्याकुल हो रहे थे इसलिए उन्होंने व्यास देव का ध्यान किया और वे प्रकट गए । व्यास देव सबके मन की बात जानने वाले थे, उन्होंने पांडवों से बिना कुछ पूछे ही कहा कि उन्हें पांचाल जाना चाहिए ।

पूछने पर व्यास देव ने द्रोपदी के पिछले जीवन का प्रसंग बताया । पिछले जन्म में द्रोपदी एक ब्राह्मण की कन्या थी जिसका विवाह नहीं हो रहा था । उसने शिव जी की तपस्या की और शिव जी प्रकट हो गए । शिव जी ने वरदान मांगने को कहा तो द्रोपदी ने पांच बार बोल दिया कि उन्हें एक बलशाली पति प्राप्त हो, एक धार्मिक पति प्राप्त हो, एक सहनशील पति प्राप्त हो इत्यादि ।

तब शिव जी ने कहा था कि तुम्हे अगले जन्म में पांच पति प्राप्त होंगे क्योंकि तुमने पांच बार पति मांगा है । व्यास देव ने बताया कि शिव जी के वरदान अनुसार पांच पांडव ही द्रोपदी के पति के रूप नियुक्त हैं इसलिए उन्हें द्रोपदी के स्वयंवर में जाना चाहिए ।


आगे की कहानी बताएंगे अगले पोस्ट में । अगली पोस्ट की जानकारी पाने केलिए व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करें । ग्रुप ज्वाइन करने के लिए यहां क्लिक करें –

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🚩🌺🪴गीता ज्ञान🪴🌺🚩 महाराज युधिस्ठिर ने बताया जीवन का सबसे बड़ा क्या है   By  वनिता कासनियां पंजाब  , यूँ तो हम सब जानते ही हैं कि आश्चर्य किसे कहते हैं लेकिन आप में से बहुत लोग शायद ना जानते हों की जीवन का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?, महाराज युधिस्ठिर के अनुसार जीवन का सबसे बड़ा आश्चर्य है अमर बनने की इच्छा । महाराज युधिस्ठिर के यक्ष को जवाब एक बार की बात है महाराज युधिस्ठिर अज्ञातवाश के समय वन में सभी पांडवों के साथ थे । जंगल में घूमते घूमते सभी पांडवों को प्यास लगने लगी । महाराज युधिस्ठिर ने एक एक करके सभी पांडवों को पानी लाने के लिए भेजा । सभी पानी लेने के लिए तो गए लेकिन वापिस लौटकर कोई भी नहीं आया । तब महाराज युधिष्ठिर ने स्वंय पांडवों को ढूढ़ने का प्रयास किया । जब महाराज युधिष्ठिर एक सरोवर के पास गए तो उन्होंने देखा कि सारे पांडव वहां बेहोस पड़े हुए हैं । महाराज युधिष्ठिर ने सोचा कि पांडवों की खबर बाद में लेते हैं पहले क्यों न सरोवर से कुछ पानी ही पी लिया जाये । जैसे ही महाराज युधिष्ठिर सरोवर से पानी पीने लगे तो वहां एक आवाज आयी जिसने उन्हें पानी पीने से रोक दिया । वह...
राष्ट्र हिंदू धर्म में वार हनुमान को किन देवताओं से क्या वरदान मिले?  हम सभी हनुमान जी द्वारा बचपन में सूर्यदेव को एक फल समझ कर खाने के प्रयास के विषय में जानते हैं। उस समय हनुमान मारुति के नाम से जाने जाते थे। बालपन में ही उन्होंने सूर्यदेव को फल समझ कर निगलना चाहा। जब देवराज इंद्र ने ये देखा तो उन्होंने सूर्य की रक्षा के लिए मारुति पर अपने वज्र से प्रहार किया। इंद्र के वज्र के प्रहार से मारुति की ठुड्डी टूट गयी और वे अचेत होकर पृथ्वी पर आ गिरे। जब पवनदेव ने ये देखा कि इंद्र देव ने उनके धर्मपुत्र पर प्रहार किया है तो उन्होंने संसार से प्राणवायु खींच ली। इससे समस्त प्राणी मृत्यु के निकट पहुँच गए। ऐसा देख कर परमपिता ब्रह्मा स्वयं वहां पहुंचे और उन्होंने पवनदेव को प्राणवायु लौटने का आदेश दिया ताकि सृष्टि सुचारु रूप से चल सके। उन्होंने ये भी समझाया कि सूर्य नवग्रहों के प्रमुख हैं और यदि उनका अहित होता तो समस्त पृथ्वी का संतुलन बिगड़ जाता। इसी कारण इंद्र द्वारा उनकी रक्षा का जो उपाय किया गया वो आवश्यक था। ये सुनकर पवनदेव ने ब्रह्माजी से प्रार्थना की कि पहले वे उनके पुत्र के प्राण बचाएं।...

कलयुग का कड़वा सच – लड़कियों का अपने ही घर में शोषण होगा। By वनिता कासनियां पंजाब=कलयुग का कड़वा सचआपको बता दें कि इस कलियुग में लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं। कलियुग का कड़वा सच है कि लड़कियों का अपना परिवार उनके साथ व्यभिचार करेगा और इस कलयुग में तो लोगों की फसल और पानी भी चोरी हो जायेंगे । हिंदू धार्मिक ग्रंथों में दी गई जानकारी के अनुसार कलियुग के अंत में अभी काफी समय बाकी है। क्योंकि, ब्रह्मपुराण के अनुसार, कलियुग की आयु उनकी 43,200 वर्ष है और कलियुग अभी शुरू हो रहा है। , जिसका पहला चरण चल रहा है।माना जाता है कि कलियुग की शुरुआत 302 ईशा पूर्व हुई थी । इसका अर्थ यह हुआ कि कलियुग को अभी 5,120 वर्ष ही हुए हैं और कलियुग में 4,26,888 वर्ष शेष हैं, लेकिन ब्रह्मप्राण में कलियुग के अंत की व्याख्या कैसे की गई है? ब्रह्मपुराण के अनुसार, कलियुग के अंत में मानव आयु केवल 12 वर्ष की बताई गयी है । इस दौरान लोगों में नफरत और नाराजगी बढ़ जाती है ।कलियुग मे मानवता बिलुप्त हो जाएगीकलयुग का कड़वा सच है कि जैसे जैसे कलयुग की उम्र बढ़ती जाएगी वैसे वैसे नदियां सूखती जाएगी । बेइमानी और अन्याय से धन कमाने वाले लोगों में बढ़ोत्तरी होगी । धन के लोभ में मनुष्य किसी की हत्या करने में भी संकोच नहीं करेगा। मनुष्य पूजा पाठ, व्रत, उपवास और सभी धार्मिक कार्य करना बंद कर देंगे । गाय दूध देना बंद कर देगी । मानवता नष्ट हो जाएगी ।लड़कियां बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं रहेंगी। उनका अपने ही घर में शोषण होगा । कलयुग का कड़वा सच है कि अपने ही घर के लोग उनके साथ क्या व्यभिचार करेंगे । बाप बेटी का भाई बहन का कोई रिश्ता नहीं रह जाएगा । एक भाई दूसरे भाई का ही शत्रु हो जाएगा । शादी जैसा पवित्र रिश्ता अपवित्र हो जाएगा । किसी की भी शादी शुदा जिंदगी ठीक से नहीं चलेगी । पति पत्नी एक दूसरे से बेवफाई करेंगे । कलयुग में समाज हिंसक हो जाएगा ।कलयुग में बलवान को ही न्याय मिलेगापराक्रमी भगवान विष्णु कल्कि अवतार लेंगे और विनाश करेंगे और पृथ्वी के चेहरे से पापियों और राक्षसों को नष्ट कर देंगे । इस प्रकार श्रीकृष्ण ने महाभारत में वर्णित किया कि कलयुग का अंत कैसे होगा । तदनुसार जो दोगली बात कहते हैं और पाप कार्य करते हैं वे इस कलियुग में राज्य करते हैं । कलियुग के बच्चों के लिए माता-पिता का प्यार इतना ज्यादा है कि लाड़ प्यार के कारण उनका अपना विकास रुक जायेगा ।कलयुग का कड़वा सच जिसमे फसल और पानी भी चोरी होंगेकलयुग का कड़वा सच यह है कि इस युग में लोग पानी पीने का सामन तक चोरी करेंगे। कलयुग के अंत के समय बड़े बड़े भयंकर युद्ध होंगे । भारी वर्षा और जोरों की गर्मी पड़ेगी। लोग खेती काट लेंगे, कपड़े चुरा लेंगे । पानी पीने का सामान और पेटियां भी चुरा ले जाएँगे । चोर अपने ही जैसे चोरों की संपत्ति चुराने लगेंगे । हत्यारों की भी हत्या होने लगेगी । चोरों से ही चोरों का नाश हो जाने के कारण जनता का कल्याण होगा ।युगांत काल में मनुष्य की आयु अधिक से अधिक बारह वर्ष की रह जाएगी । लोग दुर्बल, क्रोध, रोग तथा बुढ़ापे और शोक से ग्रसित होंगे । उस समय रोगों के कारण इंद्रिया कमजोर हो जाएगी । भगवान कहते हैं इसके बाद कलयुग में जब पाप अपने चरम पर पहुंच जाएगा और पृथ्वी से धर्म समाप्त होने लगेगा तब मैं कल्कि के रूप में अवतरित होकर इस पृथ्वी को पापों से मुक्त करूँगा और उसके बाद जो नया युग आएगा वो सत्युग कहलाएगा ।कलयुग का कड़वा सच जिसमे नयी नयी बीमारियां जन्म लेंगीमित्रो पूरी दुनिया में कोरोनाविषाणू से हाहाकार मची हुई है, कुछ समय पहले तो हालत और भी ज्यादा गंभीर थे । ऐसे में अधिकतर लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि क्या हिन्दू धर्म शास्त्रों में की गई भविष्यवाणी के अनुसार कलयुग के अंत का समय निकट आ चुका है ।क्योंकि सोशल मीडिया पर कई लोग ये दावा कर रहे हैं कि आज से करीब दस हजार साल पहले लिखे गए कुछ हिंदू धर्मग्रंथों में इस बात का वर्णन मिला है कि पूर्व के देश से कोई महामारी जन्म लेगी जो पूरे विश्व को तबाह कर देगी । लेकिन मित्रो घबराने की जरुरत नहीं है ।धार्मिक ग्रंथों की आज के समय में चल रहे कोरोनाविषाणू पर क्या टिप्पणी है? उसे समझते है। तो मित्रो आपने देखा ही होगा कि सोशल मीडिया पर कई ज्योतिष के जानकारों का विडियो वायरल हो रहा है जिसमें ये दावा किया जा रहा है कि हिंदू धर्मग्रंथों में से एक नारद संहिता में आज से करीब दस हजार साल पहले इस बात का उल्लेख किया जा चुका है कि भारत के पूर्व की ओर बसे किसी देश से महामारी की शुरुआत होगी जिस से पूरी दुनिया तबाह हो जाएगी ।कलियुग का अंत होने मे अभी लगभग चार लाख सत्ताईस हजार साल बाकी हैंपर दोस्तों घबराने की जरूरत नहीं है कलियुग की उम्र चार आँख बत्त्तीस हजार साल है और अभी कलियुग के सिर्फ पाँच हजार एक सौ बीस वर्ष ही बीते हैं। पर दोस्तो इतना सब पड़ने के बाद कोई भी घोर कलियुग में जन्म नही लेना चाहेगा परन्तु जब तक हम भगवान के भक्त नहीं बनते तब तक हमें मजबूर होकर जन्म लेना ही पड़ता है। दोस्तो उम्मीद है आपको पोस्ट पसंद आयी होगी और अगर पसंद आयी हो तो इसे शेयर जरूर करें। व्हाट्सप्प ग्रुप ज्वाइन करने के लिए यहाँ क्लिक करें ताकि आपको अगली पोस्ट की जानकारी मिल सके। शेयर करने के लिए निचे दीये गए बटनों का इस्तेमाल करें। शुक्रिया !

कलयुग का कड़वा सच – लड़कियों का अपने ही घर में शोषण होगा।   By वनिता कासनियां पंजाब= कलयुग का कड़वा सच आपको बता दें कि इस कलियुग में लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं। कलियुग का कड़वा सच है कि लड़कियों का अपना परिवार उनके साथ व्यभिचार करेगा और इस कलयुग में तो लोगों की फसल और पानी भी चोरी हो जायेंगे । हिंदू धार्मिक ग्रंथों में दी गई जानकारी के अनुसार कलियुग के अंत में अभी काफी समय बाकी है। क्योंकि, ब्रह्मपुराण के अनुसार, कलियुग की आयु उनकी 43,200 वर्ष है और कलियुग अभी शुरू हो रहा है। , जिसका पहला चरण चल रहा है। माना जाता है कि कलियुग की शुरुआत 302 ईशा पूर्व हुई थी । इसका अर्थ यह हुआ कि कलियुग को अभी 5,120 वर्ष ही हुए हैं और कलियुग में 4,26,888 वर्ष शेष हैं, लेकिन ब्रह्मप्राण में कलियुग के अंत की व्याख्या कैसे की गई है? ब्रह्मपुराण के अनुसार, कलियुग के अंत में मानव आयु केवल 12 वर्ष की बताई गयी है । इस दौरान लोगों में नफरत और नाराजगी बढ़ जाती है । कलियुग मे मानवता बिलुप्त हो जाएगी कलयुग का कड़वा सच है कि जैसे जैसे कलयुग की उम्र बढ़ती जाएगी वैसे वैसे नदियां सूखती जाएगी । बेइमानी और अन्याय से धन ...