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पांडव दुर्योधन से छिपकर कहां गए November 11, 2022 गीता ज्ञानअभी तक हमने देखा कि किस तरह पांडवों को मारने का षड्यंत्र दुर्योधन ने रचा लेकिन पांडव किसी तरह सुरंग से बचकर निकल गए । आपने पड़ा होगा कि एक भीलनी और उसके पांच बच्चे भी इस रात उस घर में जलकर मारे गए थे । अगर आपने पिछली पोस्ट नहीं पड़ी है तो आगे क्लिक करके पड़ सके हैं – पांडवों को जलने का षड्यंत्र ।इसी तरह की धार्मिक पोस्ट पड़ते रहने के लिए हमारा व्हाट्सएप ज्वाइन करें । ग्रुप ज्वाइन करने के लिए यहां क्लिक करें – WhatsappGroupसबको भीलनी और उसके बच्चों के कंकाल देखकर यही लग रहा था कि वो माता कुंती और पांडवों के कंकाल हैं । सब जगह शोक की लहर थी, जनता जानती थी कि यह दुर्योधन ने ही करवाया है । दूसरी ओर पांडव सुरंग से निकलकर एक गंगा नदी के किनारे पहुंच गए । वहां विदुर द्वारा भेजे गए एक गुप्तचर ने उन्हें नदी पार करवाकर जंगल में भेज दिया । गुप्तचर ने बताया कि विदुर जी का आदेश है कि पांडव कुछ समय भेष बदलकर ही छुपे रहें ।भीम का पहला विवाहजंगल में चलते चलते भीम के अलावा सारे भाई थक गए और आराम करने लगे । तभी वहां एक राक्षसी हिडिंबा आई जो पांडवों को मारना चाहती थी लेकिन भीम को देखकर मोहित हो गई और भीम के सामने विवाह का प्रस्ताव रखने लगी । इतने में ही हिडिंबा का भाई हिडिम्बासुर भी वहां आ गया और भीम पर उसने हमला कर दिया । भीम और हिडिम्बासुर का युद्ध बहुत लंबा चला और भीम ने उसे मार डाला ।भीम ने वापिस आकर हिडिंबा को वापिस लौट जाने को कहा लेकिन हिडम्बा ने माता कुंती से कहा कि अगर भीम उससे विवाह नहीं करते तो वह अपने प्राण त्याग देगी । तब माता कुंती ने भीम को हिडिंबा से विवाह करने का आदेश दिया । भीम ने एक शर्त पर विवाह किया कि जैसे ही हिडिंबा से उनका एक पुत्र हो जाएगा वे हिडिंबा को छोड़ देंगे । भीम और हिडिंबा का पुत्र घटोत्कच उत्पन्न हुआ जो भीम के समान बलशाली और हिडिंबा जैसा मायावी था । वह पांडवों के प्रति सम्मान की भावना रखता था और वे भी उससे बड़ा स्नेह किया करते थे ।पुत्र होने के बाद हिडिंबा भीम से दूर चली गई थी और अपने पुत्र को पांडवों के पास छोड़ गई थी । घटोत्कच का मन राक्षसों में ही लगता था इसलिए वह भी माता कुंती से आज्ञा लेकर वापिस चला गया था । उसने कहा था कि जब कभी भी पांडवों को उसकी सहायता की जरूरत होगी तब वह मात्र एक बार बुलाने पर हाजिर हो जायेगा ।पांडव कहां छिपेपांडवो को जंगल में वेदव्यास जी मिले जिन्हें उन्हें एक ब्राह्मण के घर पर भेष बदलकर रहने को कहा । पांडव ब्राम्हण के भेष में उस ब्राह्मण के घर रहने लगे थे । एक दिन उस ब्राह्मण के घर के सभी सदस्य रो रहे थे । माता कुंती ने पांडवों से कहा कि इस ब्राम्हण ने हमे छुपने की जगह दी है इसलिए इसका हमारे ऊपर एहसान है । हमे इसकी मदद करके इसका एहसान चुकाना चाहिए ।जब कुंती ने ब्राम्हण परिवार से रोने की वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि उनके गांव के बाहर एक राक्षस बकासुर रहता है ।गांव वाले बकासुर के लिए रोज एक गाड़ी अन्न और 2 भैंसे भेजते हैं लेकिन जो व्यक्ति गाड़ी और भैंसे लेकर जाता है बकासुर उसे भी खा जाता है । इस बार गाड़ी और भैंसे पहुंचाने की बारी उस ब्राह्मण के परिवार की है इसलिए सभी रो रहे हैं । माता कुंती ने कहा कि मैं अपने पुत्र भीम को इस काम के लिए भेज देती हूं । वह बड़ा ही बलवान और होशियार है जो राक्षस को भोजन भी पहुंचा देगा और जिंदा भी वापिस आ जायेगा ।भीम गाड़ी लेकर आगे आगे जा रहे थे और गाड़ी का भोजन स्वयं ही करते जा रहे थे । जब बकासुर ने भीम को आते देखा तो वह खुश हुआ लेकिन पास आने पर उसने देखा कि भीम उसका भोजन खाए जा रहे हैं तो उसने भीम पर हमला कर दिया । 10,000 हाथियों के बल से युक्त भीम ने बकासुर को मार डाला और गांव के चौराहे पर पटक दिया । गांव वालों ने जब बकासुर को मरा पाया तो वे बड़े ही प्रसन्न हुए और ब्राह्मण के घर पहुंचे । पांडव छुप कर रह रहे थे इसलिए उन्होंने ब्राह्मण को सच छिपाने के लिए कहा था और ब्राह्मण ने गांव वालों को एक झूठी कहानी बनाकर संतुष्ट कर दिया ।पांडवो को द्रोपदी के बारे में पता केसे चलाएक दिन उस ब्राह्मण के घर पर एक और ब्राह्मण आए हुए थे जो उनको काफी सारे राज्यों के बारे में विस्तार से बता रहे थे । जब ब्राह्मण ने द्रुपद का जिक्र किया तो पांडवों ने द्रुपद के बारे में विस्तार से सुनना चाहा क्योंकि उन्होंने ही उसका आधा राज्य जीता था और उसे बंधी बनाकर द्रोणाचार्य को दे दिया था ।ब्राह्मण ने बताया कि राजा द्रुपद द्रोणाचार्य के द्वारा अपने अपमान के कारण परेशान रहते हैं । अब वह पहले से कमजोर हो गए हैं और यहां वहां भटकते रहते हैं । वो आश्रम आश्रम जाते हैं ताकि कोई ब्राह्मण यज्ञ करके उन्हें ऐसा पुत्र दिलाए जो द्रोण को मार सके लेकिन उन्हें कोई ऐसा ब्राह्मण नहीं मिलता । एक बार द्रुपद को एक ब्राह्मण उपयज मिले जिनकी उन्होंने बड़े ही अच्छे से सेवा की लेकिन उपयज ने द्रुपद का काम करने से मना कर दिया ।जब मना करने के बाद भी द्रुपद ने एक साल और उपयज की सेवा की तब उन्होंने उसे अपने बड़े भाई यज के बारे में बताया । उन्होंने कहा कि यज यह काम कर देंगे । ऐसा ही हुआ, यज ने द्रुपद का काम कर दिया और यज्ञ करके उसे ऐसा पुत्र दिलाया जो द्रोण का वध कर सके । यज्ञ से एक कन्या भी प्राप्त हुई और इसी के साथ भविस्यवाणी हुई कि वह कन्या देवताओं का प्रयोजन सिद्ध करने के लिए उत्पन्न हुई है । पुत्र का नाम धृष्टद्युम्न रखा गया और पुत्री का नाम द्रोपदी ।https://vnita38.blogspot.com/2022/10/by-physical-level-psychological-level.htmlपांडव द्रोपदी के बारे में सुनकर बैचेन हो रहे थे । ब्राह्मण ने द्रोपदी के स्वयंवर के बारे में सुना तो वे वहां जाने के लिए तत्पर हो गए लेकिन उन्हें व्यास देव जी बात याद आई कि वे उसी ब्राह्मण के घर में ही रहेंगे जब तक व्यास देव अगला आदेश उन्हें न दें । पांडवों व्याकुल हो रहे थे इसलिए उन्होंने व्यास देव का ध्यान किया और वे प्रकट गए । व्यास देव सबके मन की बात जानने वाले थे, उन्होंने पांडवों से बिना कुछ पूछे ही कहा कि उन्हें पांचाल जाना चाहिए ।पूछने पर व्यास देव ने द्रोपदी के पिछले जीवन का प्रसंग बताया । पिछले जन्म में द्रोपदी एक ब्राह्मण की कन्या थी जिसका विवाह नहीं हो रहा था । उसने शिव जी की तपस्या की और शिव जी प्रकट हो गए । शिव जी ने वरदान मांगने को कहा तो द्रोपदी ने पांच बार बोल दिया कि उन्हें एक बलशाली पति प्राप्त हो, एक धार्मिक पति प्राप्त हो, एक सहनशील पति प्राप्त हो इत्यादि ।तब शिव जी ने कहा था कि तुम्हे अगले जन्म में पांच पति प्राप्त होंगे क्योंकि तुमने पांच बार पति मांगा है । व्यास देव ने बताया कि शिव जी के वरदान अनुसार पांच पांडव ही द्रोपदी के पति के रूप नियुक्त हैं इसलिए उन्हें द्रोपदी के स्वयंवर में जाना चाहिए ।आगे की कहानी बताएंगे अगले पोस्ट में । अगली पोस्ट की जानकारी पाने केलिए व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करें । ग्रुप ज्वाइन करने के लिए यहां क्लिक करें –https://chat.whatsapp.com/4ZNNZKzaDF2IrLZM2YvD2s

पांडव दुर्योधन से छिपकर कहां गए

अभी तक हमने देखा कि किस तरह पांडवों को मारने का षड्यंत्र दुर्योधन ने रचा लेकिन पांडव किसी तरह सुरंग से बचकर निकल गए । आपने पड़ा होगा कि एक भीलनी और उसके पांच बच्चे भी इस रात उस घर में जलकर मारे गए थे । अगर आपने पिछली पोस्ट नहीं पड़ी है तो आगे क्लिक करके पड़ सके हैं – पांडवों को जलने का षड्यंत्र 

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सबको भीलनी और उसके बच्चों के कंकाल देखकर यही लग रहा था कि वो माता कुंती और पांडवों के कंकाल हैं । सब जगह शोक की लहर थी, जनता जानती थी कि यह दुर्योधन ने ही करवाया है । दूसरी ओर पांडव सुरंग से निकलकर एक गंगा नदी के किनारे पहुंच गए । वहां विदुर द्वारा भेजे गए एक गुप्तचर ने उन्हें नदी पार करवाकर जंगल में भेज दिया । गुप्तचर ने बताया कि विदुर जी का आदेश है कि पांडव कुछ समय भेष बदलकर ही छुपे रहें ।

भीम का पहला विवाह

जंगल में चलते चलते भीम के अलावा सारे भाई थक गए और आराम करने लगे । तभी वहां एक राक्षसी हिडिंबा आई जो पांडवों को मारना चाहती थी लेकिन भीम को देखकर मोहित हो गई और भीम के सामने विवाह का प्रस्ताव रखने लगी । इतने में ही हिडिंबा का भाई हिडिम्बासुर भी वहां आ गया और भीम पर उसने हमला कर दिया । भीम और हिडिम्बासुर का युद्ध बहुत लंबा चला और भीम ने उसे मार डाला ।

भीम ने वापिस आकर हिडिंबा को वापिस लौट जाने को कहा लेकिन हिडम्बा ने माता कुंती से कहा कि अगर भीम उससे विवाह नहीं करते तो वह अपने प्राण त्याग देगी । तब माता कुंती ने भीम को हिडिंबा से विवाह करने का आदेश दिया । भीम ने एक शर्त पर विवाह किया कि जैसे ही हिडिंबा से उनका एक पुत्र हो जाएगा वे हिडिंबा को छोड़ देंगे । भीम और हिडिंबा का पुत्र घटोत्कच उत्पन्न हुआ जो भीम के समान बलशाली और हिडिंबा जैसा मायावी था । वह पांडवों के प्रति सम्मान की भावना रखता था और वे भी उससे बड़ा स्नेह किया करते थे ।

पुत्र होने के बाद हिडिंबा भीम से दूर चली गई थी और अपने पुत्र को पांडवों के पास छोड़ गई थी । घटोत्कच का मन राक्षसों में ही लगता था इसलिए वह भी माता कुंती से आज्ञा लेकर वापिस चला गया था । उसने कहा था कि जब कभी भी पांडवों को उसकी सहायता की जरूरत होगी तब वह मात्र एक बार बुलाने पर हाजिर हो जायेगा ।

पांडव कहां छिपे

पांडवो को जंगल में वेदव्यास जी मिले जिन्हें उन्हें एक ब्राह्मण के घर पर भेष बदलकर रहने को कहा । पांडव ब्राम्हण के भेष में उस ब्राह्मण के घर रहने लगे थे । एक दिन उस ब्राह्मण के घर के सभी सदस्य रो रहे थे । माता कुंती ने पांडवों से कहा कि इस ब्राम्हण ने हमे छुपने की जगह दी है इसलिए इसका हमारे ऊपर एहसान है । हमे इसकी मदद करके इसका एहसान चुकाना चाहिए ।

जब कुंती ने ब्राम्हण परिवार से रोने की वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि उनके गांव के बाहर एक राक्षस बकासुर रहता है ।

गांव वाले बकासुर के लिए रोज एक गाड़ी अन्न और 2 भैंसे भेजते हैं लेकिन जो व्यक्ति गाड़ी और भैंसे लेकर जाता है बकासुर उसे भी खा जाता है । इस बार गाड़ी और भैंसे पहुंचाने की बारी उस ब्राह्मण के परिवार की है इसलिए सभी रो रहे हैं । माता कुंती ने कहा कि मैं अपने पुत्र भीम को इस काम के लिए भेज देती हूं । वह बड़ा ही बलवान और होशियार है जो राक्षस को भोजन भी पहुंचा देगा और जिंदा भी वापिस आ जायेगा ।

भीम गाड़ी लेकर आगे आगे जा रहे थे और गाड़ी का भोजन स्वयं ही करते जा रहे थे । जब बकासुर ने भीम को आते देखा तो वह खुश हुआ लेकिन पास आने पर उसने देखा कि भीम उसका भोजन खाए जा रहे हैं तो उसने भीम पर हमला कर दिया । 10,000 हाथियों के बल से युक्त भीम ने बकासुर को मार डाला और गांव के चौराहे पर पटक दिया । गांव वालों ने जब बकासुर को मरा पाया तो वे बड़े ही प्रसन्न हुए और ब्राह्मण के घर पहुंचे । पांडव छुप कर रह रहे थे इसलिए उन्होंने ब्राह्मण को सच छिपाने के लिए कहा था और ब्राह्मण ने गांव वालों को एक झूठी कहानी बनाकर संतुष्ट कर दिया ।

पांडवो को द्रोपदी के बारे में पता केसे चला

एक दिन उस ब्राह्मण के घर पर एक और ब्राह्मण आए हुए थे जो उनको काफी सारे राज्यों के बारे में विस्तार से बता रहे थे । जब ब्राह्मण ने द्रुपद का जिक्र किया तो पांडवों ने द्रुपद के बारे में विस्तार से सुनना चाहा क्योंकि उन्होंने ही उसका आधा राज्य जीता था और उसे बंधी बनाकर द्रोणाचार्य को दे दिया था ।

ब्राह्मण ने बताया कि राजा द्रुपद द्रोणाचार्य के द्वारा अपने अपमान के कारण परेशान रहते हैं । अब वह पहले से कमजोर हो गए हैं और यहां वहां भटकते रहते हैं । वो आश्रम आश्रम जाते हैं ताकि कोई ब्राह्मण यज्ञ करके उन्हें ऐसा पुत्र दिलाए जो द्रोण को मार सके लेकिन उन्हें कोई ऐसा ब्राह्मण नहीं मिलता । एक बार द्रुपद को एक ब्राह्मण उपयज मिले जिनकी उन्होंने बड़े ही अच्छे से सेवा की लेकिन उपयज ने द्रुपद का काम करने से मना कर दिया ।

जब मना करने के बाद भी द्रुपद ने एक साल और उपयज की सेवा की तब उन्होंने उसे अपने बड़े भाई यज के बारे में बताया । उन्होंने कहा कि यज यह काम कर देंगे । ऐसा ही हुआ, यज ने द्रुपद का काम कर दिया और यज्ञ करके उसे ऐसा पुत्र दिलाया जो द्रोण का वध कर सके । यज्ञ से एक कन्या भी प्राप्त हुई और इसी के साथ भविस्यवाणी हुई कि वह कन्या देवताओं का प्रयोजन सिद्ध करने के लिए उत्पन्न हुई है । पुत्र का नाम धृष्टद्युम्न रखा गया और पुत्री का नाम द्रोपदी ।

https://vnita38.blogspot.com/2022/10/by-physical-level-psychological-level.html

पांडव द्रोपदी के बारे में सुनकर बैचेन हो रहे थे । ब्राह्मण ने द्रोपदी के स्वयंवर के बारे में सुना तो वे वहां जाने के लिए तत्पर हो गए लेकिन उन्हें व्यास देव जी बात याद आई कि वे उसी ब्राह्मण के घर में ही रहेंगे जब तक व्यास देव अगला आदेश उन्हें न दें । पांडवों व्याकुल हो रहे थे इसलिए उन्होंने व्यास देव का ध्यान किया और वे प्रकट गए । व्यास देव सबके मन की बात जानने वाले थे, उन्होंने पांडवों से बिना कुछ पूछे ही कहा कि उन्हें पांचाल जाना चाहिए ।

पूछने पर व्यास देव ने द्रोपदी के पिछले जीवन का प्रसंग बताया । पिछले जन्म में द्रोपदी एक ब्राह्मण की कन्या थी जिसका विवाह नहीं हो रहा था । उसने शिव जी की तपस्या की और शिव जी प्रकट हो गए । शिव जी ने वरदान मांगने को कहा तो द्रोपदी ने पांच बार बोल दिया कि उन्हें एक बलशाली पति प्राप्त हो, एक धार्मिक पति प्राप्त हो, एक सहनशील पति प्राप्त हो इत्यादि ।

तब शिव जी ने कहा था कि तुम्हे अगले जन्म में पांच पति प्राप्त होंगे क्योंकि तुमने पांच बार पति मांगा है । व्यास देव ने बताया कि शिव जी के वरदान अनुसार पांच पांडव ही द्रोपदी के पति के रूप नियुक्त हैं इसलिए उन्हें द्रोपदी के स्वयंवर में जाना चाहिए ।


आगे की कहानी बताएंगे अगले पोस्ट में । अगली पोस्ट की जानकारी पाने केलिए व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करें । ग्रुप ज्वाइन करने के लिए यहां क्लिक करें –

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कलयुग का कड़वा सच – लड़कियों का अपने ही घर में शोषण होगा। By वनिता कासनियां पंजाब=कलयुग का कड़वा सचआपको बता दें कि इस कलियुग में लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं। कलियुग का कड़वा सच है कि लड़कियों का अपना परिवार उनके साथ व्यभिचार करेगा और इस कलयुग में तो लोगों की फसल और पानी भी चोरी हो जायेंगे । हिंदू धार्मिक ग्रंथों में दी गई जानकारी के अनुसार कलियुग के अंत में अभी काफी समय बाकी है। क्योंकि, ब्रह्मपुराण के अनुसार, कलियुग की आयु उनकी 43,200 वर्ष है और कलियुग अभी शुरू हो रहा है। , जिसका पहला चरण चल रहा है।माना जाता है कि कलियुग की शुरुआत 302 ईशा पूर्व हुई थी । इसका अर्थ यह हुआ कि कलियुग को अभी 5,120 वर्ष ही हुए हैं और कलियुग में 4,26,888 वर्ष शेष हैं, लेकिन ब्रह्मप्राण में कलियुग के अंत की व्याख्या कैसे की गई है? ब्रह्मपुराण के अनुसार, कलियुग के अंत में मानव आयु केवल 12 वर्ष की बताई गयी है । इस दौरान लोगों में नफरत और नाराजगी बढ़ जाती है ।कलियुग मे मानवता बिलुप्त हो जाएगीकलयुग का कड़वा सच है कि जैसे जैसे कलयुग की उम्र बढ़ती जाएगी वैसे वैसे नदियां सूखती जाएगी । बेइमानी और अन्याय से धन कमाने वाले लोगों में बढ़ोत्तरी होगी । धन के लोभ में मनुष्य किसी की हत्या करने में भी संकोच नहीं करेगा। मनुष्य पूजा पाठ, व्रत, उपवास और सभी धार्मिक कार्य करना बंद कर देंगे । गाय दूध देना बंद कर देगी । मानवता नष्ट हो जाएगी ।लड़कियां बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं रहेंगी। उनका अपने ही घर में शोषण होगा । कलयुग का कड़वा सच है कि अपने ही घर के लोग उनके साथ क्या व्यभिचार करेंगे । बाप बेटी का भाई बहन का कोई रिश्ता नहीं रह जाएगा । एक भाई दूसरे भाई का ही शत्रु हो जाएगा । शादी जैसा पवित्र रिश्ता अपवित्र हो जाएगा । किसी की भी शादी शुदा जिंदगी ठीक से नहीं चलेगी । पति पत्नी एक दूसरे से बेवफाई करेंगे । कलयुग में समाज हिंसक हो जाएगा ।कलयुग में बलवान को ही न्याय मिलेगापराक्रमी भगवान विष्णु कल्कि अवतार लेंगे और विनाश करेंगे और पृथ्वी के चेहरे से पापियों और राक्षसों को नष्ट कर देंगे । इस प्रकार श्रीकृष्ण ने महाभारत में वर्णित किया कि कलयुग का अंत कैसे होगा । तदनुसार जो दोगली बात कहते हैं और पाप कार्य करते हैं वे इस कलियुग में राज्य करते हैं । कलियुग के बच्चों के लिए माता-पिता का प्यार इतना ज्यादा है कि लाड़ प्यार के कारण उनका अपना विकास रुक जायेगा ।कलयुग का कड़वा सच जिसमे फसल और पानी भी चोरी होंगेकलयुग का कड़वा सच यह है कि इस युग में लोग पानी पीने का सामन तक चोरी करेंगे। कलयुग के अंत के समय बड़े बड़े भयंकर युद्ध होंगे । भारी वर्षा और जोरों की गर्मी पड़ेगी। लोग खेती काट लेंगे, कपड़े चुरा लेंगे । पानी पीने का सामान और पेटियां भी चुरा ले जाएँगे । चोर अपने ही जैसे चोरों की संपत्ति चुराने लगेंगे । हत्यारों की भी हत्या होने लगेगी । चोरों से ही चोरों का नाश हो जाने के कारण जनता का कल्याण होगा ।युगांत काल में मनुष्य की आयु अधिक से अधिक बारह वर्ष की रह जाएगी । लोग दुर्बल, क्रोध, रोग तथा बुढ़ापे और शोक से ग्रसित होंगे । उस समय रोगों के कारण इंद्रिया कमजोर हो जाएगी । भगवान कहते हैं इसके बाद कलयुग में जब पाप अपने चरम पर पहुंच जाएगा और पृथ्वी से धर्म समाप्त होने लगेगा तब मैं कल्कि के रूप में अवतरित होकर इस पृथ्वी को पापों से मुक्त करूँगा और उसके बाद जो नया युग आएगा वो सत्युग कहलाएगा ।कलयुग का कड़वा सच जिसमे नयी नयी बीमारियां जन्म लेंगीमित्रो पूरी दुनिया में कोरोनाविषाणू से हाहाकार मची हुई है, कुछ समय पहले तो हालत और भी ज्यादा गंभीर थे । ऐसे में अधिकतर लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि क्या हिन्दू धर्म शास्त्रों में की गई भविष्यवाणी के अनुसार कलयुग के अंत का समय निकट आ चुका है ।क्योंकि सोशल मीडिया पर कई लोग ये दावा कर रहे हैं कि आज से करीब दस हजार साल पहले लिखे गए कुछ हिंदू धर्मग्रंथों में इस बात का वर्णन मिला है कि पूर्व के देश से कोई महामारी जन्म लेगी जो पूरे विश्व को तबाह कर देगी । लेकिन मित्रो घबराने की जरुरत नहीं है ।धार्मिक ग्रंथों की आज के समय में चल रहे कोरोनाविषाणू पर क्या टिप्पणी है? उसे समझते है। तो मित्रो आपने देखा ही होगा कि सोशल मीडिया पर कई ज्योतिष के जानकारों का विडियो वायरल हो रहा है जिसमें ये दावा किया जा रहा है कि हिंदू धर्मग्रंथों में से एक नारद संहिता में आज से करीब दस हजार साल पहले इस बात का उल्लेख किया जा चुका है कि भारत के पूर्व की ओर बसे किसी देश से महामारी की शुरुआत होगी जिस से पूरी दुनिया तबाह हो जाएगी ।कलियुग का अंत होने मे अभी लगभग चार लाख सत्ताईस हजार साल बाकी हैंपर दोस्तों घबराने की जरूरत नहीं है कलियुग की उम्र चार आँख बत्त्तीस हजार साल है और अभी कलियुग के सिर्फ पाँच हजार एक सौ बीस वर्ष ही बीते हैं। पर दोस्तो इतना सब पड़ने के बाद कोई भी घोर कलियुग में जन्म नही लेना चाहेगा परन्तु जब तक हम भगवान के भक्त नहीं बनते तब तक हमें मजबूर होकर जन्म लेना ही पड़ता है। दोस्तो उम्मीद है आपको पोस्ट पसंद आयी होगी और अगर पसंद आयी हो तो इसे शेयर जरूर करें। व्हाट्सप्प ग्रुप ज्वाइन करने के लिए यहाँ क्लिक करें ताकि आपको अगली पोस्ट की जानकारी मिल सके। शेयर करने के लिए निचे दीये गए बटनों का इस्तेमाल करें। शुक्रिया !

कलयुग का कड़वा सच – लड़कियों का अपने ही घर में शोषण होगा।   By वनिता कासनियां पंजाब= कलयुग का कड़वा सच आपको बता दें कि इस कलियुग में लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं। कलियुग का कड़वा सच है कि लड़कियों का अपना परिवार उनके साथ व्यभिचार करेगा और इस कलयुग में तो लोगों की फसल और पानी भी चोरी हो जायेंगे । हिंदू धार्मिक ग्रंथों में दी गई जानकारी के अनुसार कलियुग के अंत में अभी काफी समय बाकी है। क्योंकि, ब्रह्मपुराण के अनुसार, कलियुग की आयु उनकी 43,200 वर्ष है और कलियुग अभी शुरू हो रहा है। , जिसका पहला चरण चल रहा है। माना जाता है कि कलियुग की शुरुआत 302 ईशा पूर्व हुई थी । इसका अर्थ यह हुआ कि कलियुग को अभी 5,120 वर्ष ही हुए हैं और कलियुग में 4,26,888 वर्ष शेष हैं, लेकिन ब्रह्मप्राण में कलियुग के अंत की व्याख्या कैसे की गई है? ब्रह्मपुराण के अनुसार, कलियुग के अंत में मानव आयु केवल 12 वर्ष की बताई गयी है । इस दौरान लोगों में नफरत और नाराजगी बढ़ जाती है । कलियुग मे मानवता बिलुप्त हो जाएगी कलयुग का कड़वा सच है कि जैसे जैसे कलयुग की उम्र बढ़ती जाएगी वैसे वैसे नदियां सूखती जाएगी । बेइमानी और अन्याय से धन ...

🌹🪴गीता ज्ञान🪴🌹कटप्पा – महान भक्त, जिन्होंने अपनी दोनों आँखें भेंट दे दीं By वनिता कासनियां पंजाब. कटप्पा दोस्तों आप लोगों ने बाहुबली फिल्म जरूर देखी होगी । उसमे बताया गया है कि किस तरह एक राज्य के वफादार कटप्पा ने बाहुबली के मर जाने के बाद भी शाशन का साथ निभाया । दोस्तों क्या आप जानते हैं कि आखिर यह कटप्पा नाम शास्त्रों में कहाँ से लिया गया है । चलिए आपको बताते हैं।गीता ज्ञानआज हम कटप्पा नाम के एक व्यक्ति के बारे में जानेंगे और जानेंगे कि उसने भगवान शिव को मांस का टुकड़ा और अपनी आँखें समर्पित क्यों कीं थी । कटप्पा का जन्म कालहस्ती के पास उदयपुर में एक शिकारी परिवार में हुआ था । वर्तमान के उदयपुर में जिसे उस समय उत्तर कुरु के नाम से जाना जाता था । आंध्र प्रदेश के राजमपेट में कटप्पा एक धनुर्धर एक दिन शिकार करने गया लेकिन जंगल में उन्हें एक मंदिर मिला जिसमें शिवलिंग था ।कटप्पा भगवान शिव के भक्त थे और वह भगवान शिव को कुछ देना चाहते थे परंतु वह यह नहीं समझ पा रहे थे कि शिव को भेंट कैसे और किस प्रलकार से करें । फिर उन्होंने मांस का एक टुकड़ा भेंट देने का विचार किया जो उन्हें शिकार करने से मिला था और मासूमियत से शिवलिंग पर मांस का टुकड़ा चढ़ा दिया और खुशी से यह विश्वास करते हुए चले गए कि भगवान शिव ने उनकी भेंट स्वीकार कर ली होगी ।मंदिर की देखभाल एक ब्राह्मण करता था जो मंदिर से बहुत दूर रहता था । अगले दिन जब ब्राह्मण वहाँ पहुँचा तो शिवलिंग के बगल में मांस पड़ा हुआ देखकर दंग रह गया । लेकिन फिर उन्होंने यह सोचकर अपने मन को शांत किया कि यह किसी जानवर का काम होगा और उन्होंने मंदिर की सफाई की और अपने दैनिक अनुष्ठान किए और चले गए ।कटप्पा प्रतिदिन श्रद्धा भाव से पूजा पाठ करने लगेगाँव में कटप्पा अपने तरीके से शिवलिंग की पूजा करता था । वह शिकार के बाद शिवलिंग को देखने और उससे बात करने के लिए प्रतिदिन मंदिर जाता था और अपनी श्रद्धा भावना में मांस चढ़ाता था क्योंकि उसे पता नहीं था कि भगवान की पूजा कैसे की जाती है । हर सुबह ब्राह्मण यह सोचकर शिवलिंग की सफाई करते थे कि यह किसी जानवर ने किया होगा ।एक दिन कटप्पा शिकार के बाद फिर से मंदिर गया और शिवलिंग पर कुछ धूल देखी जिसे उसने साफ करने का फैसला किया । लेकिन कटप्पा ने पाया कि उसके पास पानी लाने के लिए कोई बर्तन नहीं है । वह पास में बहती नदी के पास गया और जैसे तैसे एक बर्तन ढूढ़कर पानी भरकर लाया । फिर शिवलिंग के पास वापस चला गया और उसने सारा पानी शिवलिंग के ऊपर डाल दिया ।जब ब्राह्मण वापस मंदिर में आया तो वह शिवलिंग पर मांस और पानी देखकर घृणा से भर गया । उसे एहसास हुआ कि कोई भी जानवर ऐसा नहीं कर सकता है और केवल इंसान ही ऐसा कर सकता है । ब्राह्मण की आँखों में आंसू भर आए और उसने भगवान शिव से पूछा कि आप अपने लिए ऐसा अपमान कैसे सहन कर सकते हैं ।ईश्वर के प्रति सच्चा प्यार और भक्तिभगवान शिव ने अपने भक्त ब्राह्मण को उत्तर दिया कि जिसे तुम अपमान समझते हो, मेरे लिए दूसरे भक्त की ओर से भेंट है । मैं उनकी भक्ति से बंधा हूँ और जो कुछ भी वह प्रदान करता है उसे स्वीकार करता हूँ । भगवान शिव ने ब्राह्मण से कहा कि यदि आप उनकी भक्ति को देखना चाहते हैं तो पास में ही कहीं छिप जाएँ क्योंकि वे आने वाले हैं । ब्राह्मण झाड़ी के पास छिप गए ।कटप्पा हमेशा की तरह मांस लेकर पहुँचा तो यह देखकर हैरान रह गया कि शिव हमेशा की तरह उसकी भेंट स्वीकार नहीं कर रहे थे । कटप्पा ने सोचा कि उसने ऐसा क्या किया है कि शिव उसकी भेंट स्वीकार नहीं कर रहे हैं । उसने शिवलिंग को करीब से देखा और पाया कि शिवलिंग की दाहिनी आँख से कुछ रिस रहा था । कटप्पा ने शिवलिंग पर कुछ जड़ी बूटियां डाल दीं ताकि वो ठीक हो सकें लेकिन कटप्पा रक्त को रोकने में असफल रहे ।अंत में कटप्पा ने अपनी आँखें देने का फैसला किया । उसने चाकू निकाल कर अपनी दाहिनी आँख को निकालकर शिवलिंग पर रख दिया । खून रुक गया और कटप्पा ने राहत की सांस ली । लेकिन तभी उसने देखा कि अब बाई आँख से खून आने लगा है । उसने तुरंत अपनी दूसरी आँख निकालने के लिए चाकू निकाला । उसे लगा कि दोनों आँखों के बिना वह नहीं देख पाएगा कि उसे आँख कहाँ रखनी है ।अपनी भक्ति भावना में उसने शिव पर पैर भी रख दियाउसने अपना एक पैर शिवलिंग की आँख पर रखा और अपनी दूसरी आँख भी निकाल कर भगवान शिव को अर्पित कर दी । भगवान शिव के प्रति कटप्पा की अपार भक्ति देखकर ब्राह्मण हैरान रह गए थे । कटप्पा की भक्ति देखकर भगवान शिव प्रकट हुए और उसकी दृष्टि लौटा दी । कटप्पा ने भगवान शिव को प्रणाम किया और भगवान शिव को देख कर उनकी आँखों में खुशी के आंसू आ गए ।एक आदिवासी को संत की उपाधि प्रदान करते हुए भगवान ने दोहराया कि यह प्रभु के लिए सच्चा प्यार और भक्ति है ना कि हमारे द्वारा की जाने वाली प्रार्थना और अनुष्ठान, जो प्रभु को अपने पूरे हृदय से प्रेम करते हैं वही उसे प्राप्त करने की आशा कर सकते हैं ।तो दोस्तो आपको यह कहानी कैसी लगी आप कमेंट करके हमें अवश्य बताएं । दोस्तों क्या आप जानते हैं कि भारत देश में न जाने कितने लोग इस तरह के सच्चे श्रद्धालुओं का मजाक उड़ाते हैं । हमाराआपसे अनुरोध है इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें । दोस्तों हमें श्रद्धालुओं की भावनाओं को समझना चाहिए न कि उनका मजाक उड़ाना चाहिए । हम इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि इस दुनिया में अश्रद्धालुओं को भी सम्मान मिलना चाहिए लेकिन कुछ थोड़े बहुत श्रद्धालुओं को उनका अधिकार मिलना चाहिए ।इसी तरह की धार्मिक और मजेदार पोस्ट को पड़ते रहने के लिए हमारा व्हाट्सप्प ग्रुप ज्वाइन अवश्य करें । ग्रुप ज्वाइन कररने के लिए यहाँ क्लिक करें – Join Whatsapp । आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

  🌹🪴  गीता ज्ञान 🪴🌹 कटप्पा – महान भक्त, जिन्होंने अपनी दोनों आँखें भेंट दे दीं   By वनिता कासनियां पंजाब. कटप्पा दोस्तों आप लोगों ने बाहुबली फिल्म जरूर देखी होगी । उसमे बताया गया है कि किस तरह एक राज्य के वफादार कटप्पा ने बाहुबली के मर जाने के बाद भी शाशन का साथ निभाया । दोस्तों क्या आप जानते हैं कि आखिर यह कटप्पा नाम शास्त्रों में कहाँ से लिया गया है । चलिए आपको बताते हैं। गीता ज्ञान आज हम कटप्पा नाम के एक व्यक्ति के बारे में जानेंगे और जानेंगे कि उसने भगवान शिव को मांस का टुकड़ा और अपनी आँखें समर्पित क्यों कीं थी । कटप्पा का जन्म कालहस्ती के पास उदयपुर में एक शिकारी परिवार में हुआ था । वर्तमान के उदयपुर में जिसे उस समय  उत्तर कुरु  के नाम से जाना जाता था । आंध्र प्रदेश के राजमपेट में कटप्पा एक धनुर्धर एक दिन शिकार करने गया लेकिन जंगल में उन्हें एक मंदिर मिला जिसमें शिवलिंग था । कटप्पा भगवान शिव के भक्त थे और वह भगवान शिव को कुछ देना चाहते थे परंतु वह यह नहीं समझ पा रहे थे कि शिव को भेंट कैसे और किस प्रलकार से करें । फिर उन्होंने मांस का एक टुकड़ा...